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130 KM/घंटा होगी ट्रेन की रफ्तार, वेस्ट यूपी का ये रेल रूट हुआ हाईटेक; चंद मिनटों में पूरा होगा सफर

उत्तर रेलवे ने गाजियाबाद-मेरठ-सहारनपुर रेल रूट पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ सकेंगी। इसको हाईस्पीड ट्रैक बनाने के लिए नई सिग्नलिंग और इंटरलॉकिंग सिस्टम को मजबूत किया गया है।

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भारतीय रेल (फोटो-Istock)

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को गति देने के लिए कवायत तेज है। उत्तर रेलवे ने गाजियाबाद-मेरठ-सहारनपुर रेल खंड पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए कदम उठाया है। इस रूट पर अब ट्रेनों की गति अधिकतम ट्रेनों की रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक करने की तैयारी की जा रही है। इससे यात्रियों को सहूलियत मिलेगी और कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के हवाले से नार्दन रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 15 अप्रैल को उस समय परिचालन उपलब्धि तक पहुंची, जब गाड़ी संख्या 12903 गोल्डन टैंपल मेल ने अप दिशा में उन्नत खंड को सुरक्षित रूप से पार किया, जो नई सिग्नलिंग और इंटरलॉकिंग प्रणालियों के सफल एकीकरण का प्रमाण है। जानकारी के मुताबिक, यह केवल क्रासिंग का सफल इंटरलाकिंग, जिसमें मॉर्डन इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर, एफ्ट्रोनिक्स की ओर से रिमोट टर्मिनल यूनिट और इंटीग्रेटेड पावर सप्लाई सिस्टम स्थापित की गई। इसके अति मेरठ छावनी और पाबली खास रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग और विजुअल डिस्प्ले यूनिट सिस्टम में सशोधन किए गए हैं। यही नहीं रेल की हाई स्पीड गति सुनिश्चित करने के लिए 90 रूट्स का परीक्षण सत्यापन सफलता के साथ किया गया।

रेलवे ने इसके लिए सिग्नलिंग सिस्टम को अपग्रेड करने का काम शुरू कर दिया है। खास तौर पर डबल डिस्टेंट सिग्नल (Double Distant Signaling) लगाए जा रहे हैं, जिससे ट्रेनों को पहले से ही आगे की स्थिति की जानकारी मिल सके और तेज गति में भी सुरक्षित संचालन संभव हो।

क्या है डबल डिस्टेंट सिग्नलिंग?

डबल डिस्टेंट सिग्नलिंग एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें ट्रेन चालक को पहले ही दो स्तर पर संकेत मिल जाते हैं। इससे ड्राइवर को ब्रेकिंग और स्पीड कंट्रोल के लिए ज्यादा समय मिलता है, जिससे तेज गति पर भी सुरक्षा बनी रहती है।

किन स्टेशनों पर हो रहा काम

इस अपग्रेड के तहत मेरठ सेक्शन में प्रमुख स्टेशनों—जैसे पाबली खास और मेरठ कैंट पर सिग्नलिंग सिस्टम मजबूत किया जा रहा है। ताकि, बिना रुके गाड़ियों को पास दिया जा सके।

यात्रियों को क्या होगा फायदा?

  • ट्रेनों की स्पीड 110 से बढ़कर 130 किमी/घंटा तक होगी
  • यात्रा समय में कमी आएगी
  • ट्रेनों की समयपालन (पंक्चुअलिटी) बेहतर होगी
  • हाई-स्पीड के बावजूद सुरक्षा और मजबूत होगी
  • रेलवे का फोकस: स्पीड + सेफ्टी

भारतीय रेलवे का लक्ष्य है कि हाई-डेंसिटी रूट्स पर आधुनिक सिग्नलिंग और ऑटोमेटिक सिस्टम लागू कर ट्रेनों की गति बढ़ाई जाए, बिना सुरक्षा से समझौता किए।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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