West Bengal Old Name: भारत का इतिहास बेहद समृद्ध और प्राचीन रहा है। समय के साथ कई शहरों और राज्यों के नाम बदलते रहे हैं, जिनमें उस दौर के साम्राज्यों, संस्कृतियों और शासकों की झलक मिलती है। उदाहरण के तौर पर, आज का पटना कभी पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था, जो मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। इसी तरह चेन्नई को पहले मद्रास और वाराणसी को काशी कहा जाता था। पर आज हम आपको एक ऐसे राज्य के बारे जिसका इतिहास बेहद ही अनोखा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल की, जो इन दिनों विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2026) की तैयारियों में व्यस्त है। ऐसे में आइए जानें भारत के इस दिलचस्प राज्य का नाम कैसे पड़ा?
क्या था बंगाल का पुराना नाम?
पश्चिम बंगाल का वर्तमान नाम उसके प्राचीन इतिहास और विभिन्न शासकों के प्रभाव से विकसित हुआ है। यह क्षेत्र कभी ‘गौड़’ या ‘गौड़ा’ नामक प्राचीन राज्य और ‘वंग’ नाम से पहचाना जाता था। समय के साथ अलग-अलग राजवंशों और राजनीतिक बदलावों ने इसके नाम को नया रूप दिया। आइए इसके नाम के विकास को समझते हैं। प्राचीन काल यानी वैदिक युग और महाभारत के समय इस क्षेत्र को ‘वंग’ कहा जाता था। यह एक शक्तिशाली समुद्री क्षेत्र माना जाता था, जो व्यापार और नौवहन के लिए प्रसिद्ध था।
गौड़ से लेकर अंग्रेजों के बंगाल प्रेसीडेंसी
चौथी से सातवीं शताब्दी के बीच यह क्षेत्र ‘गौड़’ के नाम से जाना गया। 13वीं शताब्दी में मुगल शासन के दौरान इसे ‘बंगालाह’ (Bangalah) कहा जाने लगा, जिससे आगे चलकर ‘बंगाल’ नाम प्रचलित हुआ। प्लासी का युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया और ‘बंगाल प्रेसीडेंसी’ का गठन किया। इसमें आज का पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, बिहार और ओडिशा शामिल थे।
आजादी के बाद से अब तक
1905 में लॉर्ड कर्जन ने प्रशासनिक कारणों से बंगाल का विभाजन पूर्वी और पश्चिमी भागों में किया, हालांकि 1911 में इसे फिर से एक कर दिया गया। वहीं, 1947 में भारत के विभाजन के समय ‘पश्चिम बंगाल’ नाम आधिकारिक रूप से अपनाया गया। पूर्वी हिस्सा ‘पूर्वी पाकिस्तान’ (जो बाद में बांग्लादेश बना) में चला गया, जबकि पश्चिमी भाग भारत का राज्य बना रहा। आज पश्चिम बंगाल को उसकी समृद्ध संस्कृति और बौद्धिक परंपरा के कारण ‘भारत की सांस्कृतिक राजधानी’ कहा जाता है, खासकर कोलकाता के संदर्भ में। इसके अलावा, इसे ‘पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार’ और ‘विचारकों की भूमि’ के रूप में भी जाना जाता है।
