Varanasi News: वाराणसी में गांजा तस्करी के लिए तस्करों ने नया तरीका अपनाया, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते उनकी योजना नाकाम हो गई। सिगरा पुलिस ने अंतरराज्यीय गांजा तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एक पिकअप वाहन के हाइड्रोलिक चैंबर में छिपाकर लाई जा रही 59.4 किलोग्राम गांजे की खेप बरामद की है। यह मामला अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा की याद दिला देता है। पुलिस ने इस मामले में बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बरामद गांजे की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 30 लाख रुपये आंकी गई है।
ओडिशा से गांजे की बड़ी खेप वाराणसी पहुंचाई जा रही
सिगरा इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा के मुताबिक, सावन माह को देखते हुए इलाके में विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि ओडिशा से गांजे की बड़ी खेप वाराणसी पहुंचाई जा रही है। आशंका थी कि यहां से इसे पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में सप्लाई किया जाना था। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने पूर्वोत्तर रेलवे कॉलोनी के पास लहरतारा स्थित अमूल डेयरी मोड़ पर घेराबंदी शुरू कर दी। इसी दौरान ओडिशा नंबर की एक संदिग्ध पिकअप वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली गई। जांच के दौरान वाहन के हाइड्रोलिक चैंबर में छिपाकर रखा गया गांजा बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, तस्करों ने गांजे को सामान्य तरीके से ले जाने के बजाय वाहन के अंदर बने गुप्त हिस्से में छिपाया था, ताकि चेकिंग के दौरान पुलिस को इसकी भनक न लगे।
पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में सप्लाई करने की तैयारी
पुलिस ने पिकअप वाहन की तलाशी ली तो उसके डाले के नीचे बनाए गए हाइड्रोलिक चैंबर में गांजे के 56 पैकेट बेहद गोपनीय तरीके से छिपाए हुए मिले। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बिहार के रोहतास जिले के शिवसागर निवासी मुमताज फारूकी और मुन्ना फारूकी को मौके से गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गांजे की यह खेप ओडिशा से रवाना हुई थी। इसे झारखंड और बिहार के रास्ते वाराणसी तक पहुंचाया गया था। वाराणसी आने के बाद गांजे को पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में सप्लाई करने की तैयारी थी। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही पिकअप को भी कब्जे में ले लिया है। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की खेप किसके निर्देश पर मंगाई गई थी और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सावन के दौरान भांग और गांजे की मांग आम दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। इसी बढ़ी हुई मांग को तस्कर अपने लिए कमाई का जरिया बनाने की कोशिश करते हैं। जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे स्थानों की भी जानकारी मिली है, जहां सरकारी भांग की दुकानों की आड़ में कथित तौर पर अवैध गांजे की बिक्री किए जाने की आशंका है। इस पहलू को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
