Falta Repoll Today: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक बहुमत हासिल करने और ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के अंत के बाद, राज्य की आखिरी बची फालता विधानसभा सीट पर गुरुवार सुबह 7 बजे से पुनर्मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई। यह वोटिंग शाम 6 बजे तक चली। जिसमें 87 फीसदी से ज्यादा लोगों ने अपने मतों का इस्तेमाल किया। वोटिंग प्रक्रिया के दौरान पोलिंग बूथों के आसपास कड़ी सुरक्षा तैनात दिखी। लेकिन इस पुनर्मतदान से ठीक पहले फालता सीट पर एक बेहद चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर खुद टीएमसी के आधिकारिक उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतदान से ठीक दो दिन पहले, 18 मई चुनाव मैदान से पीछे हटने की घोषणा कर दी है।
'पुष्पा झुकेगा नहीं' कहने वाले जहांगीर ने डाल दिए हथियार?
चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान पूरे निर्वाचन क्षेत्र में सबसे चर्चित और विवादित चेहरा बने हुए थे। उन्होंने बकायदा फिल्म 'पुष्पा' के मुख्य किरदार के दबंग अंदाज को अपनाते हुए अपनी छवि गढ़ी थी। वे जनसभाओं में हाथ चमकाते हुए मशहूर डायलॉग, 'पुष्पा झुकेगा नहीं' बोलते थे। हद तो तब हो गई जब मतदान से पहले उन्होंने मौके पर तैनात पुलिस ऑबजर्वर अजयपाल शर्मा को सार्वजनिक मंच से चुनौती देते हुए कहा था कि 'पुष्पा' की तरह वह भी किसी प्रशासनिक दबाव के आगे सिर नहीं झुकाएगा। हालांकि, राज्य में टीएमसी की करारी हार और फालता में दोबारा चुनाव की घोषणा के बाद 'पुष्पा' बने जहांगीर ने सरेंडर कर दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक तृणमूल नेताओं की जमकर किरकिरी हो रही है।
मैदान छोड़ने के बाद भी EVM में रहेगा नाम और सिंबल, जानिए नियम
चुनाव आयोग के मुताबिक, फालता सीट के लिए नामांकन दाखिल करने और नाम वापस लेने की कानूनी समय-सीमा बहुत पहले ही समाप्त हो चुकी है। ऐसे में तकनीकी और आधिकारिक तौर पर अब मतपत्र या ईवीएम से उम्मीदवार का नाम हटाना मुमकिन नहीं है। नियमों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर टीएमसी का 'जोड़ा फूल घास' सिंबल और जहांगीर खान का नाम व फोटो वैसे ही मौजूद रहेगी। हालांकि, जहांगीर खान या टीएमसी का कोई भी पोलिंग एजेंट या कार्यकर्ता इस मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले रहा है। मुख्य मुकाबला अब सीधे तौर पर बीजेपी के देवांशु पांडा और अन्य प्रत्याशियों के बीच रह गया है।
क्यों करानी पड़ी रिपोलिंग?
इससे पहले फालता सीट पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण के तहत मतदान हुआ था। उस दौरान आरोप लगे थे कि कम से कम 60 से अधिक पोलिंग बूथों पर EVM मशीनों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनाव चिन्ह (कमल) वाले बटन पर जानबूझकर सेलोटेप चिपका दिया गया था, ताकि लोग बीजेपी को वोट न दे सकें। तत्कालीन ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता की जांच में सामने आया कि न सिर्फ ईवीएम में हेरफेर किया गया, बल्कि कई संवेदनशील मतदान केंद्रों पर लाइव मॉनिटरिंग के लिए लगे वेब कैमरों के फुटेज और एंगल के साथ भी छेड़छाड़ की गई थी। इस लोकतांत्रिक धांधली को देखते हुए चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल के मतदान को पूरी तरह रद्द घोषित कर दिया था।
हर बूथ पर 8 कमांडो; अभेद्य सुरक्षा के बीच वोटिंग
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, इस बार धांधली की रत्ती भर भी गुंजाइश न रहे, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को दोगुना कर दिया गया है। पिछली बार जहां प्रत्येक बूथ पर सिर्फ 4 केंद्रीय सुरक्षा बल (CPF) के जवान तैनात थे, वहीं इस बार हर एक बूथ पर 8 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवान मुस्तैद किए गए हैं। फालता के कुल 285 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न कराने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की लगभग 35 कंपनियां (पैरामिलिट्री फोर्सेज) तैनात की गई हैं।
नतीजे कब आएंगे?
साउथ 24 परगना जिले की इस इकलौती सीट पर होने वाले आज के मतदान के बाद, वोटों की गिनती 24 मई 2026 को की जाएगी और इसी दिन फालता सीट का अंतिम परिणाम घोषित होगा। इसी के साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सभी 294 सीटों की अंतिम तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
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