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Gaya Pitru Paksha Mela: गया जी के देवघाट पर उमड़ा दो लाख श्रद्धालुओं का जनसैलाब, एक KM तक लगा पिंडदानियों का तांता

Gaya Pitru Paksha Mela: पितृपक्ष मेले के पहले ही दिन मोक्षधाम गया जी में श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। रिमझिम फुहारों और तेज बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का हौसला कम नहीं हुआ और करीब दो लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने फल्गु नदी के देवघाट पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान किया।

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मोक्ष की नगरी गया जी में पितृपक्ष का आगाज (फोटो: X/@gaya_dm)

Gaya Pitru Paksha Mela: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले की शुरुआत के साथ ही मोक्ष की भूमि 'गया जी' में आस्था और भक्ति का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। मेले के पहले ही दिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु अपने पितरों के उद्धार के लिए गया धाम पहुंचे। फल्गु नदी के प्रसिद्ध देवघाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही, जहां लगभग एक किलोमीटर के लंबे दायरे में लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण करते नजर आए।

मौसम ने इस बार श्रद्धालुओं की परीक्षा ली, लेकिन बारिश भी भक्तों की पितृभक्ति को डिगा न सकी। सुबह से ही कभी हल्की फुहारें तो कभी तेज बारिश होती रही, फिर भी फल्गु के तट पर बैठे श्रद्धालुओं के कदम पीछे नहीं हटे। गीली जमीन और भीगे कपड़ों के बावजूद लोगों ने पूरे मनोयोग और विधि-विधान से पुरोहितों के सानिध्य में कर्मकांड संपन्न कराया। कोई अपने दिवंगत माता-पिता के लिए तो कोई दादा-दादी और नाना-नानी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता दिखा।

14 पूर्वजों का पिंडदान करने का सौभाग्य

देश के कोने-कोने से लोग इस पावन अवसर पर गया जी पहुंचे हैं। राजस्थान के अलवर से आए राजेश कुमार पारिक ने बताया कि उन्होंने खीर से पिंडदान की शुरुआत की और अपने ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के लिए तर्पण किया। वहीं, छत्तीसगढ़ के शक्ति से आए अशोक बंसल के परिवार के लिए यह क्षण बेहद भावुक करने वाला रहा। उनके परिवार में करीब 102 साल बाद ऐसा मौका आया जब एक साथ 14 पूर्वजों का पिंडदान करने का सौभाग्य मिला। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से पहुंचीं सरिता अग्रवाल ने भी अपने सास-ससुर और अन्य परिजनों के मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान किया।

पहले ही दिन यात्रियों की संख्या दो लाख के पार

स्थानीय तीर्थ पुरोहित और गयापाल पंडा गजाधर लाल कटारिया ने बताया कि पहले ही दिन यात्रियों की संख्या दो लाख के पार पहुंच गई है। उन्होंने गया जी की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भगवान विष्णु की नगरी है, जहां गयासुर, धर्मशिला, गयापाल और स्वयं भगवान श्री हरि का संगम है। मान्यता है कि यहां श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और संतान को पुत्र होने का गौरव प्राप्त होता है।

श्रद्धालुओं की भारी संख्या और बारिश की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमें पूरी तरह मुस्तैद रहीं। घाटों पर सफाई व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आवाजाही को सुगम बनाने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि दूर-दराज से आए तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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