महाराष्ट्र में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के मजबूत राजनीतिक प्रभुत्व की पुष्टि कर दी है। विधानसभा, महानगरपालिका और अब जिला परिषद/ग्राम पंचायत—तीनों स्तरों के चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा ने जीत की हैट्रिक दर्ज की है। इन नतीजों के साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की जोड़ी को मौजूदा राजनीति की “जोड़ी नंबर-1” के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य में हाल के महीनों में हुए तीनों बड़े चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि महाराष्ट्र की जनता का जनादेश महायुति के पक्ष में है। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में भाजपा ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर महाविकास आघाड़ी के मुकाबले कहीं अधिक सीटें जीतकर अपनी बढ़त साबित की है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की सशक्त संगठनात्मक रणनीति के दम पर भाजपा ने राज्य में सबसे ज्यादा सीटें जीतने की एक अनोखी राजनीतिक हैट्रिक बनाई है। नवंबर में हुए नगर परिषद चुनाव, जनवरी में संपन्न महानगरपालिका चुनाव और अब फरवरी में हुए जिला परिषद चुनाव-तीनों में इस प्रभावशाली जोड़ी की चुनावी योजना और जमीनी संगठन का असर साफ दिखाई दिया।
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, महायुति ने 731 जिला परिषद सीटों में से 552 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि 1,462 पंचायत समिति सीटों में से 1,000 से अधिक सीटों पर महायुति को सफलता मिली है। जिला परिषद चुनाव में भाजपा 225 सीटें जीतकर सबसे आगे रही, इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को 165 और शिवसेना को 162 सीटें मिलीं।
विपक्षी महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस 55 सीटों के साथ आगे रही, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को 43 और शरद पवार की राकांपा (SP) को 26 सीटों पर जीत मिली। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने लातूर और रत्नागिरी में एक-एक सीट जीती, जबकि 20 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
पंचायत समिति चुनावों में 1,462 सीटों में से भाजपा ने 459 सीटें जीतीं। इसके बाद राकांपा को 306 और शिवसेना को 302 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 97, राकांपा (SP) ने 46 और शिवसेना (UBT) ने 89 सीटों पर जीत हासिल की। मनसे को दो और निर्दलीयों को 31 सीटें मिलीं।
