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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.19 करोड़ की ठगी, दिल्ली पुलिस ने किया साइबर क्राइम गैंग का भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक बड़े इंटर-स्टेट साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी खुद को पुलिस, CBI और अन्य जांच एजेंसियों का अफसर बताकर लोगों को डराते थे और फर्जी जांच के बहाने पैसे ट्रांसफर कराते थे। इस गिरोह ने एक 78 वर्षीय बुजुर्ग से 2.19 करोड़ रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

digital arrest gang busted

कई राज्यों में सक्रिय साइबर फ्रॉड करने वाले गैंग के 5 सदस्य गिरफ्तार (सांकेतिक चित्र)

Delhi News: दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने साइबर ठगों के एक बड़े इंटर-स्टेट गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो खुद को पुलिस, CBI और दूसरी जांच एजेंसियों का अफसर बताकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठग रहा था। इस कार्रवाई में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

बुजुर्ग से ठगे थे 2 करोड़ रुपये

इस गैंग ने एक 78 साल के बुजुर्ग से करीब 2 करोड़ 19 लाख रुपये ठग लिए थे। पीड़ित बुजुर्ग को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को लखनऊ पुलिस हेडक्वार्टर से सुमित मिश्रा बताया और कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दो गिरफ्तारी वारंट हैं। उम्र ज्यादा होने और थाने न जा पाने की बात कहने पर ठगों ने नया तरीका अपनाया इसके बाद दूसरे शख्स ने खुद को प्रेम कुमार गौतम बताते हुए कहा कि पीड़ित का आधार कार्ड गलत कामों में इस्तेमाल हुआ है। डर का माहौल बनाकर उनसे उनकी पूरी संपत्ति कैश, बैंक बैलेंस और प्रॉपर्टी की जानकारी ले ली गई।

किया डिजिटल अरेस्ट

ठगों ने बुजुर्ग को 24 घंटे व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा, घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने की सख्त हिदायत दी। इतना ही नहीं, डराने के लिए फर्जी CBI ऑफिस का सेटअप दिखाया गया और एक नकली वकील को भी वीडियो कॉल पर पेश किया गया। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने 26 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 के बीच अलग-अलग खातों में 2.19 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में 5 दिसंबर को IFSO थाने में e-FIR दर्ज हुई।

गिरफ्तार हुए आरोपी

इंस्पेक्टर सुनील कुमार की अगुवाई में बनी टीम ने बैंक खातों और डिजिटल फुटप्रिंट्स की गहन जांच की। जांच में पता चला कि सबसे पहले मध्य प्रदेश के बड़वानी के एक खाते में 1 करोड़ रुपये गए थे। इसके बाद पुलिस ने दीपेश पाटीदार (30) और अंशुल राठौर (28) नाम के तीन आरोपियों को बड़वानी, मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया। आगे की जांच में पुलिस ने जबलपुर, इंदौर, प्रयागराज, झांसी और लखनऊ में छापेमारी की। लखनऊ के एक होटल से तीन और आरोपी पकड़े गए, जिनकी पहचान श्याम बाबू गुप्ता (36), राघवेंद्र वर्मा (25), देवेश सिंह (25) के तौर पर हुई है। ये लोग फर्जी बैंक अकाउंट जुटाने और ठगी के पैसों को अलग-अलग खातों में घुमाने का काम करते थे।

रबर स्टैम्प से लेकर फर्जी आधार कार्ड हुए बरामद

आरोपी खुद को पुलिस, CBI, कस्टम्स और दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताते थे। पहले गिरफ्तारी और जेल की धमकी देते, फिर नरमी दिखाकर कहते कि शायद गलती से नाम आ गया है। समस्या ‘सुलझाने’ के नाम पर पीड़ित को तथाकथित ‘RBI के वेरिफिकेशन अकाउंट’ में पैसे ट्रांसफर करने को कहते और भरोसा दिलाते कि जांच के बाद पैसे वापस मिल जाएंगे जो कभी नहीं मिलते। इनके पास से अलग-अलग फर्मों की रबर स्टैम्प, चेक बुक, 7 मोबाइल फोन, 20 डेबिट कार्ड, आधार कार्ड की कॉपियां बरामद हुई हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला गंभीर, संगठित और कई राज्यों में फैला हुआ है। आगे की जांच जारी है और दूसरे आरोपियों और पैसों की पूरी चेन की जांच की जा रही है।

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अनुज मिश्रा
अनुज मिश्रा author

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं।... और देखें

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