Delhi News: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के साइबर सेल ने एक बड़े और संगठित वाहन ऋण धोखाधड़ी गिरोह का खुलासा करते हुए उसके तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और नकली आयकर रिटर्न (आईटीआर) के माध्यम से विभिन्न बैंकों से वाहन लोन हासिल करता था और बाद में जानबूझकर उसकी किश्तें नहीं चुकाता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मर्सिडीज सहित कुल पांच गाड़ियां भी बरामद किए हैं। क्राइम ब्रांच द्वारा रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 25 दिसंबर को साइबर सेल को इस गिरोह की गतिविधियों को लेकर एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी।
सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर संदीप सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने तकनीकी निगरानी, डेटा विश्लेषण और मैदानी जांच के जरिए मामले की तह तक पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम दिया। यह पूरी जांच एसीपी अनिल शर्मा की देखरेख में की गई। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि लोन की राशि प्राप्त होते ही आरोपी जानबूझकर ईएमआई का भुगतान बंद कर देते थे, जिसके कारण संबंधित ऋण खातों को एनपीए घोषित कर दिया जाता था। इसके अलावा, पुलिस से बचने के लिए वाहनों का पंजीकरण अलग-अलग राज्यों में दोबारा कराया जाता था ताकि उनकी पहचान और लोकेशन का पता न चल सके।
25 दिसंबर 2025 को हुई पहली गिरफ्तारी
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी अमन कुमार ने राहुल कपूर, श्याम सुंदर और राय कपूर सहित कई फर्जी नामों का इस्तेमाल कर अलग-अलग बैंक खाते खुलवाए और उन्हीं के आधार पर वाहन ऋण हासिल किए। जब आधार और पैन कार्ड की तकनीकी जांच की गई तो पाया गया कि अलग-अलग नामों के बावजूद सभी दस्तावेजों में लगी तस्वीरें एक ही व्यक्ति की थीं। प्राप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तिलक नगर स्थित अमन कुमार के निवास पर छापा मारा, जहां से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और वाहनों से संबंधित रिकॉर्ड बरामद किए गए। इसके बाद आरोपी को 25 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया।
8 जनवरी 2026 को हुई दूसरी गिरफ्तारी
आरोपी की पहचान अमन, जिसे श्याम सुंदर और राहुल कपूर के नाम से भी जाना जाता है, उम्र 46 वर्ष, के रूप में हुई। वह दिल्ली के तिलक नगर का निवासी है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह कई सालों से फर्जी नाम, पता और पहचान का इस्तेमाल कर रहा था। उसने जाली आधार कार्ड, पैन कार्ड और नकली आयकर रिटर्न के जरिए बैंक खाते खुलवाए, वाहन लोन हासिल किए और बाद में इन वाहनों को बेच दिया। इस मामले में क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 318(4), 336, 338, 340, 112 और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसी मामले में 8 जनवरी को क्राइम ब्रांच ने आरोपी धीरज, जिसे आलोक और सिद्धार्थ के नाम से भी जाना जाता है, को गिरफ्तार किया।
9 जनवरी 2026 को हुई तीसरी गिरफ्तारी
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह अमन के साथ मिलकर आलोक और सिद्धार्थ जैसे फर्जी नामों से बैंक खाते खुलवाता और उन्हीं खातों के माध्यम से वाहन लोन प्राप्त करता था। इन वाहनों को बाद में बेच दिया जाता था। धीरज ने यह भी खुलासा किया कि फर्जी आधार कार्ड नजफगढ़ स्थित साई दस्तावेज सेंटर से तैयार करवाए जाते थे। सूचना मिलने पर क्राइम ब्रांच की टीम ने उस दस्तावेज सेंटर पर छापा मारा और दुकान के मालिक को गिरफ्तार कर लिया। इसी जांच में तीसरे आरोपी के रूप में 9 जनवरी को नरेश कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से मोबाइल फोन, आई स्कैनर, बायोमेट्रिक स्कैनर, वेब कैमरा और पीवीसी कार्ड बनाने की मशीन बरामद की गई।
(इनपुट - आईएएनएस)
