Delhi News: दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन “Cy-Hawk” के दौरान एक बड़े संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क शेल कंपनियों और फर्जी (म्यूल) बैंक खातों के माध्यम से देशभर में ठगी की रकम इधर-उधर भेजता था। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि आरोपी ठगी से मिली रकम को छिपाने और घुमाने के लिए करीब 20 शेल कंपनियां चला रहे थे। ये कंपनियां केवल नाम मात्र के लिए बनाई गई थीं और इनके बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने में किया जाता था।
अब तक ₹180 करोड़ की ठगी
NCRP पोर्टल की जांच में सामने आया कि इन शेल कंपनियों से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से देशभर में 176 साइबर ठगी मामलों की शिकायतें दर्ज हैं, जिनकी कुल राशि लगभग ₹180 करोड़ आंकी गई है। जांच के दौरान एक प्राइवेट बैंक के खाते में लगातार संदिग्ध लेनदेन देखे गए। यह खाता कुद्रेमुख ट्रेडिंग (OPC) प्राइवेट लिमिटेड के नाम से खुला था और इसका पंजीकरण बाराखंभा रोड, कनॉट प्लेस पते पर पाया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह खाता वास्तव में एक म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
मृत व्यक्ति को बनाया गया मोहरा
जांच में पता चला कि कंपनी के निदेशक रहे राजेश खन्ना (जिनका अब निधन हो चुका है) को आरोपियों सुषिल चावला और राजेश कुमार ने केवल नाम मात्र के डायरेक्टर के रूप में आगे किया था। असल संचालन और पैसों के लेनदेन पर नियंत्रण इन्हीं दोनों का था। पुलिस ने जिन दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया है, उनमें 58 वर्षीय सुषिल चावला (ग्रेटर नोएडा निवासी) और 39 वर्षीय राजेश कुमार (गुरुग्राम निवासी) शामिल हैं। उनके पास से दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किए गए हैं।
जांच में क्या आया सामने?
प्राथमिक जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी एक व्यक्ति पवन रुइया के लिए काम कर रहे थे, जिस पर पश्चिम बंगाल में इसी तरह के साइबर धोखाधड़ी मामलों में शामिल होने के आरोप हैं। पुलिस ने जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और संबंधित बैंक खातों का डेटा Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) को भेज दिया है, ताकि इन्हें देशभर के अन्य मामलों से जोड़कर संभावित नेटवर्क और कड़ियों की जांच की जा सके।
