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क्या अमेरिका नहीं चाहता सस्ता हो क्रूड? शांति की बातों के बीच बरसा दिए बम, Brent $105 पार

ईरान जब होर्मुज खोलने की तैयारी में था और क्रूड के दाम तेजी से नीचे आ रहे थे, तो अमेरिका ने अचानक फिर से बम बरासने शुरू कर दिए, जिसकी वजह से फिर से क्रूड का दाम उछल गया है।

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अमेरिकी हमलों की वजह से फिर चढ़ा क्रूड

US Attack on Iran Spikes up Crude Price : फरवरी में ईरान पर शुरू हुए अमेरिकी हमले लगातार जारी हैं। करीब 8 महीने के इस संघर्ष में एक पैटर्न साफ दिखने लगा है कि जब भी स्थिति सामान्य होने की तरफ बढ़ती है, किसी न किसी बहाने युद्ध फिर भड़क उठता है, जिससे क्रूड फिर महंगा हो जाता है। पिछले 2 सप्ताह में क्रूड 118 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गया। लेकिन, शांति की उम्मीद जगने से जैसे ही दो दिन के भीतर क्रूड के दाम घटने लगे, तो अमेरिका ने एक बार फिर से ईरान पर बमों की बारिस की दी है, जिसकी वजह से फिर से क्रूड ऑयल के दाम उछल गए हैं।

ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फ्यूचर्स 48 सेंट यानी 0.5% चढ़कर 105.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत भी 47 सेंट यानी 0.5% बढ़कर 96.93 डॉलर प्रति बैरल हो गई। हालांकि, इससे ठीक एक दिन पहले यानी सोमवार को तेल बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। ब्रेंट क्रूड 8.66 डॉलर यानी 7.63% टूटकर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।

अमेरिका ने क्यूशम द्वीप किया हमला

द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका ने ईरान के क्यूशम द्वीप को निशाना बनाया है। यह द्वीप होर्मुज के पास है और तेल परिवहन के लिहाज से रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इस सैन्य कार्रवाई को रक्षात्मक बताया है। उनका कहना था कि इसका मकसद ईरान को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान की हमला करने की क्षमता हासिल करने से रोकना था।

अमेरिका की मंशा पर उठे सवाल

दिलचस्प बात यह है कि महंगे कच्चे तेल और ईंधन की किल्लत से अमेरिकी तेल कंपनियों की जमकर कमाई हो रही है। अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी तेल और गैस कंपनियों ने 6 महीने में 130 अरब डॉलर से ज्यादा का मुनाफा कमाया है। सवाल यह है कि एक तरफ युद्ध से महंगाई बढ़ रही है और दूसरी तरफ तेल कंपनियों की तिजोरी भर रही है, तो इस पूरे संकट में किसका फायदा और किसका नुकसान हो रहा है?

किस कंपनी को कितना फायदा?

महंगे क्रूड से फायदे की तस्वीर अमेरिकी तेल कंपनियों के तिमाही नतीजों में भी दिखाई देती है। ExxonMobil ने अक्टूबर तिमाही में 15.4 अरब डॉलर की कमाई दर्ज की, जो एक साल पहले के मुकाबले डबल है। इसी तरह Chevron का तिमाही का मुनाफा बढ़कर 9.9 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.5 अरब डॉलर था। Valero Energy का तीसरी तिमाही का मुनाफा 1.1 अरब डॉलर से बढ़कर 6.8 अरब डॉलर हो गया है। इस तरह अमेरिकी तेल कंपनियों को बेहिसाब फायदा हुआ है।

इनपुट एजेंसीज

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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