Delhi News: 3 मई को आयोजित हुई नीट-यूजी (NEET-UG 2026) परीक्षा के पेपर लीक होने और उसके बाद परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले ने देश के लाखों छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। इस प्रशासनिक विफलता और धांधली के खिलाफ छात्र संगठनों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। राजधानी दिल्ली के शास्त्री भवन के बाहर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार के खिलाफ एक विशाल और उग्र प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की।
"डॉक्टर की डिग्री बिकाऊ है"
प्रदर्शन के दौरान NSUI कार्यकर्ताओं के हाथों में जो प्लैकार्ड्स थे, वे परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे थे। तख्तियों पर "डॉक्टर की डिग्री बिकाऊ है" और "छात्रों की मौत का जिम्मेदार कौन" जैसे तीखे नारे लिखे हुए थे। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा कराने वाली संस्था NTA पूरी तरह से फेल हो चुकी है और वह देश के 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। छात्र संगठन ने मांग की है कि बार-बार पेपर लीक करने और परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने में नाकाम रहने वाली एजेंसी NTA को तुरंत बैन किया जाए।
क्यों रद्द हुई परीक्षा और क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 3 मई को देश-विदेश के 5,400 से अधिक केंद्रों पर नीट परीक्षा आयोजित की गई थी। लेकिन राजस्थान के सीकर और अन्य इलाकों से पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने और "गेस पेपर्स" के सवाल मुख्य परीक्षा से हूबहू मिलने के बाद सरकार ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया। इस मामले की जांच अब सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई है। कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं लेकिन छात्रों का कहना है कि हर बार परीक्षा रद्द करना और दोबारा तारीखें घोषित करना समाधान नहीं है। साल भर दिन-रात मेहनत करने वाले छात्रों के लिए इस मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ को दोबारा झेलना बेहद दर्दनाक है।
