Uttar Pradesh Election 2027: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अब संगठनात्मक स्तर पर अपनी कमर कस ली है। पार्टी का पूरा फोकस उन सीटों पर है जहां 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिल पाए थे। लखनऊ में हाल ही में हुई बैठकों के दौरान यूपी बीजेपी प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ हार के आंकड़ों की समीक्षा का वक्त चला गया है, पार्टी को अब जमीन पर ठोस समाधान चाहिए।
‘कहां हारे, क्यों हारे और अब क्या करेंगे’...इन तीन सवालों पर जोर
पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए विनोद तावड़े ने क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के सामने साफ एजेंडा रखा है। बैठकों में मुख्य तौर पर तीन बिंदुओं पर जवाब मांगे गए हैं-
- नुकसान कहां हुआ: किन विधानसभा क्षेत्रों और बूथों पर पार्टी पिछड़ी।
- कारण क्या रहे: हार के पीछे के राजनीतिक और संगठनात्मक कारण क्या थे।
- आगे का रोडमैप: उन कमियों को दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की रणनीति क्या है।
2022 और 2024 के अंतर को पाटने के लिए माइक्रोमैनेजमेंट
बीजेपी मानती है कि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के वोटों के अंतर का बूथवार विश्लेषण बेहद जरूरी है। जिन इलाकों या बूथों पर पार्टी कमजोर हुई है, वहां स्थानीय समीकरणों और सामाजिक ताने-बाने को साधने के लिए माइक्रो-लेवल पर योजना बनाई जा रही है:
कमजोर बूथों की पहचान
उन बूथों पर विशेष फोकस जहां पिछले चुनावों में प्रदर्शन गिरा है।
जातीय समीकरणों की टोह
हर बूथ पर मौजूद जातियों की संख्या के हिसाब से छोटी-बड़ी हर आबादी तक पहुंच बनाने की रणनीति।
संगठन में प्रतिनिधित्व
स्थानीय स्तर पर समन्वय बैठाने के लिए बूथ समितियों में हर वर्ग को उचित जगह देना।
चारों सह-प्रभारियों को सौंपी गई क्षेत्रों की कमान
मिशन-2027 को अमलीजामा पहनाने के लिए नियुक्त किए गए चार सह-प्रभारियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों की अहम जिम्मेदारी सौंप दी गई है..
