टीनएजर्स के लिए शुरुआत में बहुत भारी वजन उठाना जरूरी नहीं है। बॉडीवेट एक्सरसाइज और हल्के वजन से स्क्वाट, लंज, पुश-अप जैसी एक्सरसाइज की जा सकती हैं।
किसी भी एक्सरसाइज में वजन बढ़ाने से पहले उसकी सही तकनीक सीखना जरूरी है। गलत तरीके से एक्सरसाइज करने पर मांसपेशियों और जोड़ों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
दौड़ना, साइकिल चलाना, तैरना, तेज चलना या कोई आउटडोर खेल अच्छी कार्डियो एक्टिविटी हो सकती है। इससे फिटनेस के साथ स्टैमिना बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
शरीर को एक्सरसाइज के बाद रिकवरी का समय चाहिए। रोज हैवी ट्रेनिंग करने के बजाय वर्कआउट के बीच आराम और हल्की एक्टिविटी को जगह देना बेहतर है।
वर्कआउट शुरू करने से पहले कुछ मिनट वार्म-अप करें। एक्सरसाइज खत्म करने के बाद हल्की स्ट्रेचिंग और कूल-डाउन भी रूटीन का हिस्सा रखें।
टीनएज में शरीर तेजी से विकसित होता है। इसलिए पर्याप्त प्रोटीन, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पानी के साथ रोज पर्याप्त नींद लेना भी फिटनेस रूटीन का हिस्सा होना चाहिए।
अगर कोई टीनएजर जिम में वजन के साथ ट्रेनिंग करना चाहता है, तो योग्य ट्रेनर की निगरानी जरूरी है। हर बच्चे की उम्र, फिटनेस और शारीरिक विकास अलग होता है, इसलिए रूटीन भी उसी के अनुसार होना चाहिए।