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NEET पेपर लीक ने छीने चार सपने... आखिर इन बुझते चिरागों का जिम्मेदार कौन?

NEET 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देश भर से आ रही छात्रों की आत्महत्या की खबरों ने झकझोर दिया है। ये छात्रों की खुदकुशी की खबरें केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह हमारे देश की मृतप्राय हो चुकी व्यवस्था का डेथ वारंट हैं।

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Photo : Times Now Digital
नीट रद्द होने के सदमे में टूटे छात्रों की जिम्मेदारी किसकी
Authored by: निशांत तिवारी
Updated May 16, 2026, 13:19 IST
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क्या किसी देश के भविष्य को चंद रुपयों के लालच में इस कदर नीलाम किया जा सकता है कि देश के सबसे होनहार और मेहनती युवा एक-एक करके मौत को गले लगाने लगें? नीट पेपर लीक विवाद (NEET Paper Leak) के बाद 3 मई को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा को रद्द करने के फैसले ने देश भर के लाखों छात्रों को उस अंधेरी खाई में धकेल दिया है, जहां से अब केवल चीखें और लाशें बाहर आ रही हैं। यह कोई सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है; यह 'पेपर लीक माफिया' और लचर 'एग्जाम सिस्टम' द्वारा मिलकर की जा रही सामूहिक हत्याएं हैं। राजस्थान के सीकर से लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर, दिल्ली के आजादपुर और गोवा के कर्टोरिम तक चार दिनों के भीतर चार मुस्कुराती जिंदगियां इस भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ चुकी हैं।

भ्रष्ट तंत्र की बलि चढ़े देश के ये चार होनहार

1. सीकर, राजस्थान: 3 बहनों का इकलौता भाई प्रदीप

झुंझुनूं के एक बेहद गरीब परिवार का बेटा प्रदीप माहीच (22) पिछले तीन-चार साल से सीकर के एक कमरे की चार दीवारों के बीच अपनी आंखें घिस रहा था। पिता ने तिनका-तिनका जोड़कर उसे पढ़ाया था। 3 मई की परीक्षा के बाद प्रदीप के चेहरे पर एक ऐसी चमक थी जो सालों की गरीबी मिटने के बाद आती है। आंसर-की (Answer Keys) मिलाने के बाद उसने पिता से गर्व से कहा था कि "पापा, 650 से ज्यादा नंबर आ रहे हैं, इस बार आपका बेटा डॉक्टर बन जाएगा।" प्रदीप ने मकान मालिक से कहा था कि 15 मई तक का किराया जमा है, उसके बाद वह सामान समेटकर हमेशा के लिए घर आ जाएगा। लेकिन 15 मई को उसका सामान नहीं, उसकी लाश घर पहुंची। शुक्रवार सुबह उसने पिता को फोन कर बस से दूध और छाछ भिजवाने को कहा था, और उसके कुछ ही मिनटों बाद उसने फंदे से लटककर जान दे दी। परीक्षा रद्द होने की अनिश्चितता और दोबारा उसी नरक से गुजरने का खौफ वह बर्दाश्त नहीं कर सका।

2. लखीमपुर खीरी, यूपी: तीसरे प्रयास में टूटी ऋतिक की उम्मीदें

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के गंगोत्रीनगर में रहने वाले 21 वर्षीय ऋतिक मिश्रा की कहानी भी वैसी ही दर्दनाक है। ऋतिक का यह नीट का तीसरा प्रयास था। दो बार की असफलताओं से सीखकर उसने दिन-रात एक कर दिया था। इस बार वह पूरी तरह आश्वस्त था कि उसका सपना सच होने वाला है। लेकिन मंगलवार को जैसे ही परीक्षा रद्द होने का फरमान आया, ऋतिक अंदर से पूरी तरह टूट गया। बुधवार को उसने अपने पिता अनूप मिश्रा के सामने अपनी मानसिक पीड़ा जाहिर भी की थी, लेकिन कोई नहीं जानता था कि गुरुवार को वह अपने ही कमरे में फांसी लगा लेगा। ऋतिक की मौत के बाद भड़के आक्रोश के बीच समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा है।

3. आजादपुर, दिल्ली: एक और भावी डॉक्टर ने ली जान

देश की राजधानी दिल्ली के आजादपुर इलाके में रहने वाली 20 वर्षीय एक होनहार छात्रा ने भी गुरुवार को अपने घर में कथित रूप से खुदकुशी कर ली। वह पिछले कई सालों से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के सदमे ने उसे इस कदर सुन्न कर दिया कि उसने चुपचाप मौत को गले लगा लिया। बदहवास परिजनों को कानूनी प्रक्रियाओं का पता नहीं था, इसलिए वे बिना पुलिस को सूचना दिए ही उसका अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट ले गए, जहां बाद में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

4. कर्टोरिम, गोवा: 17 साल का मासूम हार गया जिंदगी की जंग

मूल रूप से बेंगलुरु का रहने वाला और गोवा में पढ़ रहा 17 वर्षीय एक मासूम छात्र भी इस व्यवस्था की क्रूरता का शिकार हो गया। वह पढ़ाई के साथ-साथ एक समर्पित हॉकी खिलाड़ी भी था। बुधवार को जब उसके रेलवे गार्ड पिता ड्यूटी से घर लौटे, तो उन्हें अपने इकलौते बेटे का शव फंदे से लटकता मिला। मरने से पहले इस 17 साल के बच्चे ने एक सुसाइड नोट छोड़ा, जो इस देश के सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है। उसने लिखा कि वह अब किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में नहीं बैठना चाहता। उसमें फिर से उसी थका देने वाली प्रक्रिया से गुजरने की हिम्मत नहीं है।

सफेदपोश माफिया और लाचार एजेंसियां: आखिर कब तक?

ये मौतें कोई इत्तफाक नहीं हैं। यह उस माफिया का किया-धरा पाप है जो एसी कमरों में बैठकर, टेलीग्राम चैनलों और व्हाट्सएप ग्रुपों पर लाखों रुपये में देश का भविष्य बेच देते हैं। पिछले तीन सालों में यह दूसरी बार है जब नीट जैसी बड़ी परीक्षा का पेपर लीक हुआ है। इसके पहले 2024 में भी नीट और यूजीसी-नेट के पेपर लीक हुए थे। NTA ने परीक्षा तो रद्द कर दी और 21 जून को दोबारा परीक्षा की तारीख भी घोषित कर दी, लेकिन क्या अफसरों को अंदाजा है कि उसी आर्थिक तंगी के बीच एक गरीब और मध्यमवर्गीय छात्र के लिए दोबारा उसी मानसिक दबाव और उसी अनिश्चितता का सामना करना कितना भारी होता है?

नेताओं के बयान आ रहे हैं, विपक्ष प्रदर्शन कर रहा है, CBI जांच हो रही है लेकिन इन सबसे उन मां-बाप की सूनी गोद कभी नहीं भरेगी जिनके बच्चे अब इस दुनिया में नहीं रहे। यदि अब भी इस देश का क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम और सरकार इन पेपर लीक माफियाओं को कड़ी सजा नहीं दे सकतीं, इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं को लीक होने से नहीं रोक सकतीं तो हमें यह मान लेना चाहिए कि एक समाज के रूप में हम पूरी तरह फेल हो चुके हैं।

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