Yamuna Water Level: रविवार को यमुना नदी के जलस्तर में गिरावट आने से दिल्लीवासियों, खासकर नदी के किनारे बसे लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली है। निगमबोध घाट क्षेत्र में रहने वाले लोग जहां जलस्तर घटने से खुश नजर आए, वहीं बारिश के मौसम का आनंद लेते हुए कुछ लोगों ने तैराकी का भी लुत्फ उठाया। हालांकि विशेषज्ञों और प्रशासन की मानें तो खतरा अभी टला नहीं है।
शनिवार को बढ़ा था जलस्तर
शनिवार को यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ता देखा गया था। पानी का बहाव इतना तेज था कि खतरे के निशान को पार कर गया था। इस स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी। शास्त्री पार्क के लोहे के पुल के पास और निगमबोध घाट जैसे क्षेत्रों में जलस्तर लोगों के घरों के बेहद करीब पहुंच गया था।
पहाड़ों में बारिश से बनी बाढ़ की आशंका
यमुना नदी में पानी के बढ़ते बहाव का मुख्य कारण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश है। इसके अलावा, हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी भी खतरे को और बढ़ा रहा है। इसके चलते निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
प्रशासन कर रहा निगरानी, फिर भी चिंता बनी हुई है
दिल्ली प्रशासन की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। निगमबोध घाट के पास बने कई अस्थायी घरों के नजदीक तक पानी पहुंच चुका है। अगर जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी होती है, तो पानी घरों में प्रवेश कर सकता है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
कैसे मापा जाता है यमुना में बाढ़ का खतरा
दिल्ली में यमुना नदी का खतरे का निशान 204.50 मीटर और बाढ़ का स्तर 205.33 मीटर तय किया गया है। पुराने लोहे के रेल पुल को इस निगरानी का सूचक माना जाता है। जब पानी इस पुल की ऊंचाई को छूता है, तब राजधानी में बाढ़ आने की प्रबल संभावना मानी जाती है।
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