दिल्ली

'बस' सेवा यहीं तक! DTC में ये महिलाएं नहीं कर पाएंगी फ्री सफर, रेखा सरकार ने खड़े किए हाथ

दिल्ली सरकार ने डीटीसी की बसों में राजधानी के बाहर की महिलाओं को फ्री सफर देने वाली योजना को विराम देने का प्लान बनाया है। अब सिर्फ दिल्ली की निवासी महिलाएं नि:शुल्क यात्रा का लाभ उठा सकेंगी।

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डीटीसी बसों में बाहरी महिलाओं को नहीं मिलेगा फ्री सफर का लाभ (फोटो-ट्विटर)

दिल्ली : दिल्ली की डीटीसी बसों में फ्री यात्रा करने वाली महिलाओं को झटका लगा है। हालांकि, ये दिल्ली के बाहर की महिला यात्रियों के लिए आदेश है। दरअसल, नई वाली सरकार अब केवल दिल्ली की ही महिलाओं को मुफ्त सफर देने का प्लान तैयार किया। अब डीटीसी बसों में मुफ्त यात्रा की अनुमति देने के लिए महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए एक विशेष 'पिंक कार्ड' भी पेश किया जाएगा। इसे सुचारू रूप से लागू करने के लिए बैंकों के साथ चर्चा चल रही है। कुल मिलाकर बसों में टिकट की जगह पिंक पास लागू किए जाएंगे। ये पास दिल्ली की महिलाओं को ही दिए जाएंगे।

'आप' की योजना पर कटौती

दरअसल, दिल्ली में साल 2019 में आम आदमी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में महिलाओं के लिए फ्री बस योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत कोई भी महिला (चाहे दिल्ली के बाहर की हों) डीटीसी की बसों में फ्री यात्रा कर सकती थी। लेकिन, रेखा सरकार ने दिल्ली की बाहर की महिलाओं को बस में सफर के लिए किराया वसूलने का प्लान तैयार कर दिया है।

वायर की खबर के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव की पहल की है। एक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के आधुनिकीकरण, बस बुनियादी ढांचे के अपग्रेड और यात्रियों की पहुंच में सुधार के लिए मार्गों को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से प्रमुख सुधारों की समीक्षा कर रही हैं।

आईआईटी दिल्ली की विशेषज्ञता के आधार पर, शहर भर के बस मार्गों को युक्तिसंगत बनाया जा रहा है, ताकि वंचित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार हो और मेट्रो तथा आगामी आरआरटीएस सेवाओं के साथ बेहतर एकीकरण सुनिश्चित हो सके। बयान के अनुसार, यमुना विहार में एक पायलट रूट पुनर्गठन योजना शुरू होगी। मुख्यमंत्री ने एक एकीकृत स्मार्ट ट्रैवल कार्ड की योजना की भी समीक्षा की, जो डीटीसी बसों, दिल्ली मेट्रो और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) में निर्बाध यात्रा को सक्षम करेगा।

गुप्ता ने कहा कि 4,800 इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े के बावजूद, जिनमें 660 छोटी और 1,800 बड़ी ई-बसें, और 1,800 सीएनजी बसें शामिल हैं, कई बसें अभी भी पुराने रूटों पर चल रही हैं, जिससे उनकी प्रभावशीलता कम हो रही है। इन रूटों को युक्तिसंगत बनाना अंतिम-मील कनेक्टिविटी में सुधार की सुधार रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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