दिल्ली

सावधान : सांसों पर धुंआ का पहरा, दिल्ली-NCR में हर जिंदगी में घुल रहा जहर; खतरनाक AQI से मरीजों से फुल हो रहे हॉस्पिटल!

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली गुरुवार को घने स्मॉग की चपेट में रही, जिससे लोगों को आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं झेलनी पड़ीं। वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर के करीब पहुंच गया है, जबकि दृश्यता भी काफी घट गई। विशेषज्ञों का कहना है कि धीमी हवाएं, नमी और तापमान में गिरावट ने प्रदूषकों को जमीन के पास रोक दिया है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं।

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घने स्मॉग की चादर से ढकी दिल्ली (फोटो क्रेडिट: iStock)

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Delhi Air Pollution: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को घना स्मॉग छाया रहा, जिससे लोगों को आंखों में जलन और खांसी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर के करीब पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की मौजूदा परिस्थितियां प्रदूषक तत्वों को जमीन के पास रोक रही हैं, जिसके कारण प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जताया है कि सप्ताहभर सुबह और देर शाम के समय धुंध बनी रहेगी, क्योंकि सतह के नजदीक सूक्ष्म कण लगातार जमा हो रहे हैं। दिवाली के बाद से दिल्ली की हवा लगातार खराब हो रही है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का एक्यूआई 373 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। यह बुधवार के 279 के मुकाबले काफी अधिक है। गाढ़े स्मॉग के कारण दृश्यता में भारी कमी आई, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, पीएम 2.5 का स्तर 184.4 और पीएम 10 का स्तर 301.9 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों ने इसे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक बताया है।

300 से अधिक एक्यूआई दर्ज

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली के 38 वायु निगरानी केंद्रों में से 37 ने 300 से अधिक एक्यूआई दर्ज किया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। इनमें से कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता “गंभीर” स्तर पर पहुंच गई। विवेक विहार में 426, आनंद विहार में 415, अशोक विहार में 414, बवाना में 411, वजीरपुर में 419 और सोनिया विहार में 406 का एक्यूआई दर्ज किया गया। एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक रही — नोएडा में एक्यूआई 372, गाजियाबाद में 364, ग्रेटर नोएडा में 330, गुरुग्राम में 248 और फरीदाबाद में 166 रहा। सीपीसीबी के मानकों के अनुसार, एक्यूआई 0-50 “अच्छा”, 51-100 “संतोषजनक”, 101-200 “मध्यम”, 201-300 “खराब”, 301-400 “बहुत खराब” और 401-500 “गंभीर” श्रेणी में माना जाता है।

कोहरे और प्रदूषकों का मिश्रण है स्मॉग

विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली के ऊपर छाया हुआ पीला धुआं वास्तव में स्मॉग है। यह कोहरे और प्रदूषकों का मिश्रण है, जो दृश्यता को घटाने के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। यह स्थिति खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में पीएम 2.5 स्तर में सबसे बड़ा योगदान परिवहन क्षेत्र का रहा, जो लगभग 15.9 प्रतिशत है। इसके बाद पराली जलाने से करीब छह प्रतिशत और घरेलू उत्सर्जन से चार प्रतिशत प्रदूषण बढ़ा। आसपास के शहरों में गाजियाबाद से लगभग 10 प्रतिशत और नोएडा से छह प्रतिशत प्रदूषण दिल्ली की हवा में शामिल हुआ, जबकि अन्य क्षेत्रीय स्रोतों ने मिलकर 22 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। 29 अक्टूबर को एकत्र किए गए उपग्रह आंकड़ों से पता चला कि पंजाब में 283 और हरियाणा में 10 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं, जो राजधानी की गिरती वायु गुणवत्ता पर लगातार पड़ रहे प्रभाव को दर्शाती हैं।

तापमान में कमी के कारण धुंध बनने की प्रक्रिया तेज

स्काईमेट वेदर के विशेषज्ञ महेश पलावत ने बताया कि तापमान में कमी धुंध बनने की प्रक्रिया को तेज करती है, क्योंकि ठंडक के कारण प्रदूषक कण निचले वायुमंडल में जमा हो जाते हैं। उनके अनुसार, पूर्व दिशा से चल रही दो से पांच किलोमीटर प्रति घंटे की धीमी हवाएं और बढ़ी हुई नमी ने गुरुवार को वायु गुणवत्ता को और बिगाड़ दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मध्यम और निम्न स्तर के बादलों ने आसमान को ढक रखा है, जबकि नोएडा और फरीदाबाद में कहीं-कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। पर्यावरण संगठन एनवायरोकैटालिस्ट के संस्थापक एवं प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया का कहना है कि हवा की कम गति और बादलों की मौजूदगी प्रदूषकों के फैलाव में बाधा डाल रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि वायु गुणवत्ता में ठोस सुधार तभी संभव है जब दिल्ली-एनसीआर में बिजली संयंत्रों, औद्योगिक इकाइयों, परिवहन, कचरा प्रबंधन और निर्माण कार्यों से होने वाले उत्सर्जन को सख्ती से नियंत्रित किया जाए।

दिल्ली में छाई धुंध की मोटी परत

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पूर्व अतिरिक्त निदेशक और वायु प्रयोगशाला के प्रमुख दीपांकर साहा ने बताया कि इस समय दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता का बिगड़ना सामान्य मौसमी घटना है। उनके अनुसार, हवा की धीमी रफ्तार और वायुमंडल की तापीय परत (इनवर्जन लेयर) के नीचे आने से हवा में ठहराव बढ़ जाता है, जिससे प्रदूषक जमीन के पास जमा हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गंगा के मैदानी इलाकों में भी हवा की गति कम रहने के कारण यही स्थिति देखने को मिल रही है, लेकिन अगर उत्सर्जन के स्रोतों को घटाया जाए तो हानिकारक कणों में कमी लाई जा सकती है। वायु गुणवत्ता की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, दिल्ली का “वेंटिलेशन इंडेक्स”—जो प्रदूषकों के फैलाव की क्षमता को मापता है, फिलहाल 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड के आदर्श स्तर से नीचे बना हुआ है। दस किलोमीटर प्रति घंटे से कम की हवा और अधिक आर्द्रता के कारण प्रदूषक वातावरण में फैल नहीं पा रहे हैं, जिससे आसमान पर धुंध की मोटी परत छाई हुई है। सुबह 7:30 बजे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पालम में दृश्यता 1,000 मीटर और सफदरजंग में 800 मीटर दर्ज की, जहां दोनों स्थानों पर हवा लगभग शांत रही।

अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या

दिल्ली के अस्पतालों में इन दिनों खांसी, सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और नाक बंद होने जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के उपाध्यक्ष डॉ. विवेक नांगिया ने बताया कि गुरुवार को आए लगभग सभी मरीजों ने बताया कि दिवाली के बाद से उनके लक्षण और अधिक गंभीर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोगों में खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द और नाक बंद होने जैसी समस्याएं वायु गुणवत्ता सूचकांक के बढ़ने के साथ बढ़ी हैं। मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मेधा के अनुसार, खराब वायु गुणवत्ता के चलते कई मरीज आंखों में जलन, गले में खराश और नींद में बाधा जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री कम था, जबकि न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औसत से लगभग चार डिग्री अधिक है। शाम 5:30 बजे आर्द्रता का स्तर 75 प्रतिशत मापा गया। आईएमडी ने अनुमान जताया है कि शुक्रवार को हल्का कोहरा छाया रह सकता है और तापमान क्रमशः अधिकतम 30 डिग्री तथा न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

(इनपुट - भाषा)

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Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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