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क्यों फूटता है 'प्रदूषण बम', क्या है पॉल्यूशन का सॉल्यूशन?

Air Pollution AQI Across India (एयर क्वालिटी दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, लखनऊ) : सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, मौसमी गतिविधियां थमने के बाद लगभग अक्टूबर महीने के शुरुआत से ही शहरों और महानगरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरू होता है। बढ़ता पॉल्यूशन न सिर्फ वातावरण को प्रदूषित करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी खतरनाक प्रभाव डालता है। आइये जानते हैं प्रदूषण के बढ़ने के कारक क्या हैं और इससे बचाव के उपाय क्या हैं? इसके अलावा हम यह भी बताएंगे कि आप घर बैठे अपने शहर की एयर क्वालिटी (Hawa Ki Quality) कैसे चेक करें?

Pollution Hawa Ki Gunvatta.

प्रदूषण एक्यूआई ताजा अपडेट

Air Quality And Weather Forecast Thandi: सर्दियों की आहट होते ही पॉल्यूशन का मीटर स्टार्ट हो जाता है। खासकर, बड़े शहरों या महानगरों में यह समस्या गंभीर होने से सासों पर संकट आने लगता है! मौसमी गतिविधियां थमते ही वातावरण में धुंआ और धुंध का ग्राफ बढ़ता है, जिससे तमाम तरह की पाबंदियां लागू की जाती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो हवा में हानिकारक गैसें धुएं और धूल जैसे प्रदूषक तत्व घुलते हैं, जो सांस लेने समेत अन्य समस्याएं पैदा करते हैं। खासकर, मेट्रो शहरों में हवा की बिगड़ती गुणवत्ता चिंता का विषय बनती जा रही है। वाली से पहले ही दिल्ली-एनसीआर से जुड़े शहरों में वायु प्रदूषण ने खतरनाक लेवल पार कर लिया है। सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल (ताजा आंकड़ों के मुताबिक) नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है। उधर, गाजियाबाद के लोनी इलाके में हवा की गुणवत्ता दिल्ली के अधिकांश क्षेत्रों से भी अधिक खराब स्थिति में पहुंच गई है। आइये जानते हैं प्रदूषण बढ़ने की वजह क्या है? इसमें मौजूद PM2.5 और PM10 क्या है और इनसे बचाव के लिए सबसे कारगर उपाय क्या हो सकते हैं?

सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, दिवाली से पहले ही दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के आसपास, यानी बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया है। गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरों में एक्यूआई 400 के पार पहुंच गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि दिवाली पर फूटने वाले पटाखे 'पॉल्यूशन बम' का काम करेंगे, जो चिंता का सबसे बड़ा कारण है। इसके अतिरिक्त हरियाणा,पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में धुंध छाई नजर आ रही है।

शहर का नामएक्यूआई लेवल
दिल्ली 437
मुंबई 170
कानपुर 205
लखनऊ 175
भोपाल 190
जयपुर 150
पटना 150
देहरादून 120
शिमला 105
चंडीगढ़ 120
हैदराबाद 140
बेंगलुरु 80

सर्दियों में क्यों बढ़ता है प्रदूषण ?

दरअसल, ठंडी हवा गर्म हवा की तुलना में भारी होती है और नीचे की ओर बहती है। इससे हवा की वर्टिकल स्पीड काफी कम हो जाती है और उसमें प्रदूषक तत्व फंसे रह जाते हैं। इसके अतिरिक्त सर्दियों में हवा में काफी नमी कम होती है।

प्रदूषण कितने प्रकार का होता है?

हम सभी ने स्कूलिंग के दौरान प्रदूषण के प्रकार के बारें में किताबों में पढ़ा होगा या मास्टर साहब ने चर्चा की होगी। तो चलिए आज हम इसे दोहरा लेते हैं। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, कूड़ा-कचरा, ध्वनि प्रदूषण, प्लास्टिक प्रदूषण, मृदा संदूषण, रेडियोधर्मी संदूषण, तापीय प्रदूषण, प्रकाश प्रदूषण इत्यादि मुख्य तौर पर गिने गए। इनमें सबसे वायु प्रदूषण सबसे अधिक परेशान कर रहा है। इससे देशभर के तमाम शहर परेशान हैं।

दिल्ली का प्रदूषण स्तर (फोटो-Istoc)

दिल्ली का प्रदूषण स्तर (फोटो-Istoc)

कितना प्रदूषण खतरनाक होता है?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, शून्य से 50 तक एक्यूआई अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर माना जाता है।

क्या है ग्रैप सिस्टम

हवा की बिगड़ती गुणवत्ता को देखते हुए वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बनाए गए ग्रेप (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के पहले चरण को लागू कर दिया गया है। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण निर्माण कार्यों पर रोक और डीजल जनरेटर के उपयोग पर प्रतिबंध जैसे उपाय शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदूषण का स्तर इसी तरह बना रहा तो जल्द ही ग्रेप के अन्य चरण लागू किये जा सकते हैं। अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि ओजोन और पीएम10 प्रमुख प्रदूषक तत्व रहे हैं। कई दिनों पर इनका स्तर बहुत अधिक दर्ज किया गया, जो दिवाली से पहले ही वायु गुणवत्ता में गिरावट का संकेत दे रहा था। 'बहुत खराब' श्रेणी का एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

ग्रैप-1 कब लागू किया जाता है?

ग्रैप-1 को तब लागू किया जाता है, एक्यूआई यानी हवा की गुणवत्ता 200 से 300 के बीच होती है। इस चरण में निर्माण कार्य पर जैसे बिल्डिंग, सड़क या अन्य निर्माण कार्य पर हल्के फुल्के प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

ग्रैप-2 कब लागू होता है?

ग्रैप-2 तब लागू किया जाता है, जब हवा की क्वालिटी (AQI) जब 301 से 401 के बीच दर्ज की जाती है। इसमें ग्रैप-1 के सभी प्रतिबंधों के साथ स्कूलों को बंद करने और शहरों में निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाती है।

ग्रैप-3 कब लागू होता है?

ग्रैप-3 तब लागू किया जाता है, जब हवा की गुणवत्ता (AQI) 401 से 450 के बीच होती है। इस स्तर पर प्रदूषण के पहुंचने पर ग्रैप-2 के प्रतिबंधों के साथ सभी औद्योगिक इकाइयां यानी कारखाने, फैक्ट्रियों को बंद करते हुए सभी प्रकार के निर्माण और विध्वंश कार्यों को रोकते हुए कड़े उपाय लागू किये जाते हैं।

ग्रैप-4 कब लागू होता है?

ग्रैप-4 सबसे खतरनाक या सबसे हाई लेवल के प्रदूषण को टच करना है, जो एक्यूआई 450 से अधिक होने पर लागू किया जाता है। इस स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए सभी प्रकार के प्रतिबंध एक साथ लगाए जाते हैं, जिसके तहत स्कलूों में ऑनलाइन कक्षाएं लागू होती हैं। इस दौरान अधिकांश कंपनियों में वर्फ फ्रॉम होम जैसी सेवाएं लागू की जाती हैं।

प्रदूषण फैलाने वाले कारक (फोटो-Istock)

प्रदूषण फैलाने वाले कारक (फोटो-Istock)

प्रदूषण से कैसे बचें?

प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति में विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस व हृदय रोगियों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। हवा में धुंध और धुआं छाए रहने के दौरान लंबे समय तक बाहर रहने से बचना चाहिए और घर के अंदर हवा शुद्ध करने वाले उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।

ग्रीन पटाखों की अनुमित

दिल्ली में दिवाली मनाने के लिए ग्रीन पटाखों को अनुमति दी गई है। हालांकि, इसके भी कुछ दुष्परिणाम हो सकते हैं। इससे पशुओं को चोट पहुंचने और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होगी। हालांकि, पर्यावरण अनुकूल कहे जाने वाले पटाखों की वापसी से अधिकतर लोग इसका दुरुपयोग कर सकते हैं।

ग्रीन पटाखे क्या होते हैं?

ग्रीन पटाखे आम पटाखों के मुकाबले कम धुआं और कम आवाज करते हैं। इन्हें सीएसआईआर-नीरी ने तैयार किया है। जैसा कि सामान्य पटाखे 160 डेसीमल तक शोर करते हैं, वहीं ग्रीन पटाखे सिर्फ 110 से 125 तक ही आवाज करते हैं। इनमें एलुमिनियम, पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे हानिकारक केमिकल्स या तो बहुत कम होते हैं या नहीं होते हैं। इनमें हानिकारक गैसों की बजाय खुशबू निकलती यानी बारूद की तरह बदबू नहीं आती है।

प्रदूषण से बचाव करें (फोटो-Istock)

प्रदूषण से बचाव करें (फोटो-Istock)

पॉल्यूशन से बचाव कैसे करें?

  1. विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रदूषण से बचने ते लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए और ऊर्जा कुशल उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही प्लास्टिक का कम उपयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त घर में एयर प्यूरीफायर लगाना लाभकारी साबित होगा।
  2. मास्क का इस्तेमाल करें - हाई डेंसिटी वाले प्रदूषण से बचने के लिए N95 क्वालिटी वाले मास्क पहनें, जो पीएम2.5 जैसै कणों को रोकने में सक्षम हैं।
  3. एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें- घर के वातावरण को जहरीली से बचाने के लिए घर के अंदर एयर प्यूरीफायर और तुलसी, नीम या स्पाइडर प्लांट लगाएं, हवा को शुद्ध बनाने में सक्षम हैं।
  4. धूम्रपान से करें बचाव - प्रदूषण से बचाव के लिए घर के अंदर अगरबत्ती या कोयला जलाने से परहेज करें।
  5. स्वच्छता का रखें ख्याल - घर में धूल मिट्टी हटाने के लिए वैक्यूम क्लीनर का उपयोग करें और घर के पर्दे इत्यादि की नियमित साफ सफाई करें।
  6. पेड़ पौधे रोपें - शुद्ध हवा के खातिर अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाएं क्योंकि पेड़ हवा को साफ रखने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।

पॉल्यूशन कैसे चेक करें

भारत में सर्दियों के सीजन की शुरुआत से प्रदूषण का मीटर तेजी से भागने लगता है। बढ़ते पॉल्यूशन को प्रति घंटे या दिन के हिसाब से तुरंत कैसे चेक करें? इसके लिए गूगल ने पिछले दिनों अपने नेविगेशन ऐप में नया फीचर जोड़ा था। इसकी सहायता है आप रियल टाइम पॉल्यूशन डेटा को ट्रैक कर सकते हैं। कुल मिलाकर आप गूगल मैप्स के जरिए भी रियल टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चेक कर सकते हैं।

पीएम2.5 क्या है?

प्रदूषण के बढ़ते ग्राफ के बीच अक्सर हम पीएम2.5 की बात करते हैं। तो आपकी जानकारी के लिए PM2.5 बहुत छोटे प्रदूषण कण होते हैं, जो सांस लेने के लिए दौरान फेफड़ों और रक्त प्रवाह में गहराई तक पहुंच जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। यह प्रदूषण कोयला जलाने जलाने वाले पावर प्लांट, वाहनों से निकलने वाले धुएं और फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले धुएं के प्रकोप से बढ़ता है। घरों में जमने वाली धूल भी इसका कारक बनती है। लिहाजा, इससे बचाव के लिए उक्त कारकों पर लगाम लगानी होगी। इसकी अधिकता से स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।

प्रदूषण से बच्चों को रखें सुरक्षित (फोटो-Istock)

प्रदूषण से बच्चों को रखें सुरक्षित (फोटो-Istock)

प्रदूषण में PM10 किसे कहते हैं?

PM10 अक्सर नवंबर दिसंबर और जनवरी के महीनों में सुनाई देता है। यह हवा में मौजूद उन कणों को कहते हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर से अधिक नहीं होता। ये कण विशेष रूप से खतरनाक होते हैं, क्योंकि इनमें कैंसर को जन्म देने वाले पदार्थ शामिल होते हैं, जिनमें बेंजोपाइरीन, फ्यूरान, डाइऑक्सिन और भारी धातुएं शामिल होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद गंभीर माने जाते हैं।

पटाखों से परेशान कहां करें शिकायत

दिवाली पर पटाखों की आवाज से न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण होता है, बल्कि इंसानों के साथ जानवरों को भारी समस्या होती है। ऐसे में लोग जानना चाहतें है कि पटाखों की आवाज से परेशानी होने कहां शिकायत करें? तो हम आपतो बता दें कि नॉर्मल पुलिस हेल्पलाइन नंबर (112) पर आप कॉल कर सकते हैं। या आप अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन पर जाकर फिजिकल शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इतना ही नहीं आप पॉल्यूशन नियंत्रण बोर्ड या नगर पालिका, नगर निगम या महापौर कार्यालय इत्यादि के अधिकारियों से भी संपर्क कर समास्या का समाधान करा सकते हैं। ज्यादा गंभीर मामलों में आप पर्यावरण संबंधी अदालतों या राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

दिल्ली में पॉल्यूशन के दौरान यात्रा करें या नहीं?

देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के शहरों में अन्य शहरों के मुकाबले हवा की क्वालिटी ज्यादा खराब पाई जाती है। खासकर, अक्टूबर से लेकर फरवरी तक एक्यूआई लेवल खतरनाक श्रेणी या बहुत खतरनाक श्रेणी तक पहुंचता है, जिससे शुद्ध हवा में सांस लेना सपना हो जाता है, लिहाजा यदि बहुत जरूरी न हो तो इस दौरान दिल्ली की यात्रा से परहेज कर सकते हैं। हालांकि, इससे बचाव के उपाय भी अपनाए जाते हैं।

Pushpendra Kumar
Pushpendra Kumar author

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ... और देखें

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