दिल्ली

आजादी के नायकों के बलिदान पर आधारित है केशव भारद्वाज की पुस्तक 'रेडलाइट', लंबे अरसे बाद भोजपुरी में लिखी गई ऐसी गद्य

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Feb 20, 2024, 06:26 PM IST

केशव भारद्वाज की पुस्तक 'रेडलाइट' आजादी के नायकों की यह कहानी आस्था, त्याग और समर्पण पर आधारित है। यह किताब ब्रिटिश औपनिवेशिक देशों में माननीय त्रासदी की एक ऐतिहासिक दस्तावेज है।

Image

केशव भारद्वाज की पुस्तक 'रेडलाइट'

Keshav Bhardwaj Book Redlight: केशव भारद्वाज की कहानी 'रेडलाइट' ब्रिटिश औपनिवेशिक देशों में माननीय त्रासदी की एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। नायक, कंपाला के प्रसिद्ध जामग्रस्त रेडलाइट पर अवस्थित 'मुलागो अस्पताल' को स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति आस्था, त्याग और समर्पण की स्थली के रूप में देखता है। छोटी परंतु बेहद मार्मिक इस कहानी में केशव ने मानवीय जीजिविषा के सारे रंग बिखेरे हैं।

पुलिसिया प्रशिक्षण प्राप्त नायक भारत से कोसों दूर अफ्रीकी समाज की विसंगतियों पर नजर फेरते गाहे-बगाहे उसे भारतीय समाज के मूल्यों व संस्कारों से जोड़ते भी रहते हैं। अपने निवास के निकट प्राचीन गणेश मंदिर समेत प्रवासी भारतीयों के संगत पाकर उद्वेलित भी हो जाते हैं। आधुनिकता संग पारम्परिकता के सुंदर मेल को चकाचौंध करने वाले नाईट क्लबों और विश्व में उन्मूलित मलेरिया से मरते लोगों को भी देखते हैं।

कहानी में नायक की जीवनचर्या

Keshav Bhardwaj Book Redlight

केशव भारद्वाज की कहानी 'रेडलाइट'

भारत तथा युगांडा के सामाजिक सार्वभौमिक तत्त्वों की खोज नायक का पसंदीदा विषय है। कहानी हमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्मा के प्रसिद्ध प्रधानमंत्री यू शॉ का ब्रिटिश हुकुमत के विरुद्ध ताकतवर अभियान और उन्हें युद्धबंदी बनाए जाने की मार्मिक कथा से भी परिचित कराता है। कहानी के मध्य में जामग्रस्त ट्रैफिक रेडलाइट पर नायक का प्रतिदिन रुकना, भारत की तरह ही चौराहे पर लगे स्थानीय वस्तुओं के हाट-बाजार की गहमा गहमी को देखना, उसका पसंदीदा जीवनचर्या बन जाता है।रेडलाइट पर रसीले आम की टोकरी के बोझ से दबी कंपाला की आकर्षक युवती के यौवन का रूप आस्वादन जहां पुरुष तत्त्व की सहज चाहत को दर्शाता है। वहीं, उसके आरोग्य की पूछताछ करना और उसके आम की टोकरी की कीमतों पर तोलमोल करने की आदत के प्रति खेद प्रकट करना, मानव मूल्यों का उदात्त रूप है। केशव ने अपनी कहानी के जरिए 'मुलागो अस्पताल' को ऐतिहासिक महत्त्व का विषय बना दिया जो विश्व कथा साहित्य में एक रूपक बन गया। यह अस्पताल, पेरिस के उस प्रसिद्ध 'कब्रिस्तान' की तरह है जो फ्रांसीसी राज्य क्रांति के अधिनायकों के साथ विश्व प्रसिद्ध विचारकों, दार्शनिकों और आंदोलनकारियों की कब्र से पटा है।

स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, समर्पण और बलिदान की कहानी

'मुलागो अस्पताल', द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश दमनकारी शक्ति द्वारा माल्टा से लाए 47 युद्धबंदियों को युगांडा के 'बाम्बो बैरक' में रखा , जहां वे मलेरिया के शिकार हुए और अंततः 'मुलागो अस्पताल' पहुंच अपने प्राण न्यौछावर किए। यह कहानी अस्पताल के जरिए भारत से लेकर अफ्रीका तक की जनता को अपने पूर्वज स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग को स्मरण करने और उनके प्रति समर्पण की भाव रखने को मजबूर करता है।

इसके अलावा, गोलकी फ्रेम के चश्मा कहानी में बेतिया शहर की सारी पुरानी बातें सिनेमा के रील के जैसे घुम रही होती है। महारानी जानकी कुंवर कालेज के स्थापना के पीछे की वजह की बात अद्भुत ढंग से दर्शाया गया है। जार्ज आरवेल, प्रकाश झा और मनोज वाजपेई को भी एक ही कहानी में भाव के प्रवाह में उकेरा गया है। अभी भी उस शहर के लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। इसको पढते समय ऐसा लगा जैसे कोई स्थापित लेखक का साहित्य पढ़ा जा रहा है।

कल्पवास में प्रयाग का बेबाक और बेजोड़ वर्णन

बता दें, फैसला और खिलौना महिला शक्ति को दर्शाते हुए जबरदस्त बुनी हुई है। कल्पवास में प्रयाग का बेबाक और बेजोड़ वर्णन भी देखने को मिलता है। इस किताब को हर उस व्यक्ति को जरूर पढ़ना चाहिए, जो उस युग का हो। वह अपने आप को इस किताब का एक पात्र ही समझेगा। इस किताब की हर कहानी बढ़िया-जीवंत मेरे और आपके, गांव-घर और शहर की है। जानकारी दे दें, भोजपुरी में ऐसी कथेतर गद्य एक लंबे अरसे के बाद लिखी गई है, जो आपको शुरू से लेकर आखिर तक बांधे रखेगी।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Delhi News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

और पढ़ें
End of Article