दिल्ली

Delhi Flood Alert: यमुना खादर को भी धराली बनने में नहीं लगेगी देर, ऐसी जगह बना डाले पक्के मकान

दिल्ली में यमुना खादर क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अवैध निर्माण ने बाढ़ का खतरा और गहरा कर दिया है। पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट बताती है कि सात अवैध कॉलोनियां नदी के प्रवाह को बाधित कर रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो दिल्ली में भी धराली जैसी तबाही देखने को मिल सकती है।

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फाइल फोटो (ANI)

Photo : ANI

Delhi News: उत्तराखंड के धराली कस्बे में हाल ही में खीर गंगा नदी के पुराने स्वरूप में लौटने से हुई तबाही ने चेतावनी दी है कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कितना बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। इसी तरह का खतरा अब दिल्ली की यमुना नदी के किनारे भी मंडरा रहा है। दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यमुना खादर क्षेत्र में सात अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं। इन कॉलोनियों ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर दिया है।

यमुना के क्षेत्रफल में बने मकान

रिपोर्ट के अनुसार, यमुना का कुल क्षेत्रफल 9,700 हेक्टेयर है, जिसमें अब तीन हजार से अधिक पक्के मकान खड़े हो चुके हैं और करीब 22,000 लोग यहां रह रहे हैं। यह अवैध बसावट केवल बाढ़ का खतरा ही नहीं बढ़ाती, बल्कि राहत कार्यों में संसाधनों की भारी कमी भी पैदा करती है।

अतिक्रमण मुक्त कराई गई जगहों पर फिर से बसावट

दैनिक जागरण में छपी खबर के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के कारण इन कॉलोनियों को बढ़ावा देते रहे हैं। मास्टरप्लान-2041 की मानें तो यमुना खादर का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है। डीडीए का दावा है कि अब तक 621 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई जगहों पर दोबारा बसावट शुरू हो गई है।

दिल्ली में धराली जैसी घटना का खतरा

पर्यावरणविद् डॉ. अनिल गुप्ता का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यमुना का जलस्तर बढ़ने पर दिल्ली को धराली जैसी भयावह स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला केवल अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि पर्यावरण और मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

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