दिल्ली

गैंगस्टर्स के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने बनाया खास प्लान, अब सोशल मीडिया पर होगी निगरानी

Delhi News: दिल्ली पुलिस ने अपराधियों पर शिंकजा करने के लिए नया तरीका अपनाया है। अब दिल्ली पुलिस गैंगस्टर के सोशल मीडिया 'प्रोफाइल' पर नजर रखेगी। अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम गैंगस्टर के वीडियो या रील शेयर करने वाले अलग-अलग ‘प्रोफाइल’ पर नजर रखेगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

Photo : iStock

Delhi Police plan against Gangster: ‘गैंगस्टर’ और अपराधियों के सोशल मीडिया पोस्ट या ‘प्रोफाइल’ को लाइक करना, साझा करना या ‘फॉलो’ करना अब ‘इंटरनेट’ उपयोगकर्ताओं के लिए मुसीबत बन सकता है। दिल्ली पुलिस ने ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखनी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि ‘असामाजिक’ तत्वों की पहचान करने के लिए उनके सोशल मीडिया ‘प्रोफाइल’ की लगातार जांच की जाएगी।

सोशल मीडिया गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश

पुलिस ने ‘असामाजिक’ तत्वों की सूची में उन लोगों को रखा है जिन्हें अपराध करने के बाद कई बार गिरफ्तार किया गया हो, या पकड़ा गया हो और उन्हें जेल अथवा सुधार गृह भेजा गया हो, लेकिन इसके बाद भी वे फिर से आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गए हों। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने दिल्ली के विभिन्न जिलों के सभी पुलिस थानों और चौकियों को ‘असामाजिक’ तत्वों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं।'

उन्होंने कहा कि उन अपराधियों की एक सूची तैयार की जाएगी, जिन्हें ये ‘असामाजिक तत्व’ ‘फॉलो’ करते होंगे। उन्होंने कहा कि सभी 15 जिलों की पुलिस और विशेष प्रकोष्ठ, अपराध शाखा, रेलवे तथा मेट्रो जैसी सभी इकाइयों को उन अपराधियों की सूची तैयार करने को कहा गया है जो सोशल मीडिया पर किसी गैंगस्टर को ‘फॉलो’ कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट को लाइक या शेयर कर रहे हैं, इससे गैंगस्टर के साथ उनके संबंधों का पता लगाया जा सकेगा।

गैंगस्टर के वीडियो या रील शेयर करने वालों पर भी नजर

अधिकारी ने बताया कि पहले भी कई ‘असामाजिक’ तत्वों को सोशल मीडिया पर आग्नेयास्त्रों के साथ तस्वीरें या वीडियो डालने के लिए गिरफ्तार किया गया था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम गैंगस्टर के वीडियो या रील शेयर करने वाले अलग-अलग ‘प्रोफाइल’ पर नजर रखेगी। अधिकारी ने बताया कि गैंगस्टर, किशोरों और युवाओं को अपना संभावित लक्ष्य बनाते हैं।

उन्होंने कहा, 'गैंगस्टर के स्थानीय सहयोगी उन युवाओं पर नजर रखते हैं जो या तो हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं या किसी छोटे-मोटे अपराध में शामिल होते हैं। ये सहयोगी गैंगस्टर के साथ अपना प्रोफाइल साझा करते हैं; बाद में गैंगस्टर इन युवाओं को अपराध करने के लिए धन और हथियार मुहैया कराते हैं।'

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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