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Delhi: नादिर शाह हत्याकांड मामले में दिल्ली पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी, मुख्य शूटर गिरफ्तार

Delhi Crime: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को नादिर शाह हत्याकांड मामले में बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। जिस जिम मालिक की दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस कांड के मुख्य शूटर को पुलिस ने दबोच लिया है। पुलिस और अपराधी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

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दिल्ली के नादिर शाह हत्याकांड मामले में बड़ा अपडेट।

Nadir Shah Murder Case: दिल्ली के नादिर शाह हत्याकांड मामले में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल को बड़ी कामयाबी मिली है। नादिर शाह हत्याकांड का मुख्य शूटर एनकाउंटर में गिरफ्तार हो गया है। पुलिस और गैंगस्टर के बीच कई राउड फायरिंग हुई। इस दौरान पुलिस ने उस अपराधी को दबोच लिया, जिसने पिछले महीने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में एक जिम मालिक को गोलियों से भूनकर उसे मौत के घाट उतार दिया था।

गैंगस्टर ने पुलिस पर चलाई अंधाधुन गोलियां

इस मुठभेड़ में मधुर उर्फ मोटा अरमान को कई गोलियां लगीं, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। अरमान ने पुलिस की टीम पर जबरजस्त फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग शुरू की। नरेला इंडस्ट्रीज इलाके में इस एनकाउंटर को अंजाम दिया गया है। आरोपी के पास से हथियार भी बरामद हुए हैं।

इस शूटर ने नादिर शाह पर की थी फायरिंग

यही वो शूटर है, जिसने पिछले महीने नादिर शाह पर फायरिंग की थी, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि स्पेशल सेल और गैंगस्टर के बीच करीब 12 राउंड फायरिंग हुई।

जिम के मालिक को लगी 5 गोलियां, हुई मौत

पिछले महीने ये खबर सामने आई थी कि साउथ दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश के ई ब्लॉक में 12 सितंबर को देर रात अज्ञात बदमाश स्कूटी पर सवार होकर आए और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। नादिर अहमद शाह नाम के व्यक्ति को 5 गोलियां लग गई। उसके दोस्तों ने आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुंचाया। लेकिन अधिक खून बहने के कारण उसकी मौत हो चुकी थी। नादिर शाह जिम का मालिक था, उसने पार्टनरशिप में जिम खोला था।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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