दिल्ली

Delhi Police: वसूली के लिए नाबालिगों का इस्तेमाल करते थे लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ , फिरौती के तीन मॉड्यूल का भंडाफोड़

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 12, 2023, 11:00 AM IST

Delhi Police: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के तीन जबरन वसूली मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गैंग के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यह गिरफ्तारी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से की है। पुलिस ने छह हथियार भी बरामद किए हैं।

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लॉरेंस बिश्नोई

Photo : BCCL

Delhi Police: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई भले ही जेल में हो, लेकिन उसके अपराधों की दुनिया के कांड अभी तक बंद नहीं हुए हैं। अब दिल्ली पुलिस ने गोल्डी बराड़-लॉरेंस बिश्नोई गैंग के तीन वसूली मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। खास बात यह है कि पुलिसिया जांच में सामने आया है कि लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ वसूली के लिए नाबालिगों का इस्तेमाल करता था। इसमें से ज्यादातर 16 से 17 साल के बीच के होते थे।

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए इस गैंग से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई में छह हथियार भी बरामद हुए हैं। अधिकारियों ने बताया है कि यह गिरफ्तारी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से की गई है।

कारोबारियों के घर पर कराई थी फायरिंग अधिकारियों ने बताया कि लॉरेंस बिश्नोर्ठ और उसके भाई अनमोल बिश्नोर्ठ ने इन शूटरों से दिल्ली में तीन अलग-अलग कारोबारियों के घरों पर रंगदारी के लिए फायरिंग कराई थी। ये शूटर जबरन वसूली के लिए कारोबारियों को धमकाने का काम कर रहे थे।

साबरमती जेल में शिफ्ट किया गया लॉरेंस बिश्नोई

हाल ही में लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात की साबरमती जेल में शिफ्ट किया गया है। यह वही जेल हैं, जहां माफिया अतीक अहमद को रखा गया था। बीते नौ मई को गुजरात की नलिया कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद से साबरमती जेल में भेजने का आदेश दिया गया था।

देशभर में है लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गेरिपोर्ट के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई भले ही जेल में हो, लेकिन उसका नेटवर्क पूरे देश में फैला है। वह जेल से ही अपना गैंग चला रहा है और अपराधों को अंजाम दे रहा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉरेंस के देशीार में एक हजार से ज्यादा गुर्गे और शॉर्प शूटर्स हैं। ये गुर्गे लॉरेंस के एक इशारे पर वारदात को अंजाम देते हैं।

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प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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