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Times Now Summit 2025: 'अनगाइडेड मिसाइल से काम नहीं चलेगा', CM रेखा गुप्ता ने दिल्ली के एजुकेशन सिस्टम को लेकर केजरीवाल को कोसा

Times Now Summit 2025: टाइम्स नाउ समिट 2025 समिट में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछली सरकार की खामियां गिनाते हुए कहा कि पिछली सरकार ने एजुकेशन सेक्टर में सिर्फ प्रोपगेंडा किया, काम कुछ नहीं किया। एजुकेशन सेक्टर में उन्होंने खास ध्यान नहीं दिया। मेरा फोकस है कि जो देश की नई शिक्षा नीति बनी है, उससे जोड़ते हुए दिल्ली की शिक्षा चले।

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टाइम्स नाउ समिट 2025 में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

Times Now Summit 2025: टाइम्स नाउ समिट 2025 में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने टाइम्स नाउ और टाइम्स नाउ नवभारत की ग्रुप एडिटर-इन-चीफ नाविका कुमार के साथ बात करते हुए राजधानी की एजुकेशन सिस्टम, हेल्थ सेक्टर समेत अलग-अलग क्षेत्र में पिछली सरकार की खामियां गिनाई। उन्होंने एजुकेशन सेक्टर पर तो साफ-साफ कहा कि अनगाइडेड मिसाइल से काम नहीं चलेगा।

दिल्ली के एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर को लेकर क्या बोलीं मुख्यमंत्री?

सीएम रेखा गुप्ता ने एक सवाल के जवाब में कहा कि 'मैं एक गृहणी हूं, नेता हूं और दिल्ली की मुख्यमंत्री हूं। अगर मैं दिल्ली को एक परिवार के तौर पर देख रहीं हूं, तो मैं ये समझती हूं कि किस सेक्टर में कितना ध्यान देना होगा। चाहें वो एजुकेशन हो, हेल्थ सेक्टर हो... पिछली सरकार ने एजुकेशन सेक्टर में सिर्फ प्रोपगेंडा किया, काम कुछ नहीं किया।

उन्होंने आगे कहा कि 'एजुकेशन सेक्टर में उन्होंने खास ध्यान नहीं दिया। मेरा फोकस है कि जो देश की नई शिक्षा नीति बनी है, उससे जोड़ते हुए दिल्ली की शिक्षा चले। हम अपने सरकारी स्कूल के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अनगाइडेड मिसाइल से काम नहीं चलेगा, एजुकेशन सेक्टर को नई दिशा देने की जरूरत है।'

क्या रेखा गुप्ता ने कभी सोचा था कि वो दिल्ली की मुख्यमंत्री बनेंगी?

इस सवाल के जवाब में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि 'मुख्यमंत्री बनूंगी ये कभी नहीं सोचा था, विधायक बनना मेरा सपना था। 2015 और 2020 में जब मैंने चुनाव लड़ा, बड़े ही कम अंतर से चुनाव हारी। हालांकि हारने के तुरंत बाद मैं फिर से विधायक बनने के लिए मेहनत करने लगती थी।'

उन्होंने बताया कि 'जिस दिन ये घोषणा होनी थी, शाम के वक्त विधायक दल की बैठक बुलाई गई। जब मैं गई तो मेरे एक साथी विधायक ने मुझसे कहा कि क्या आपको फोन आया है, तो मैंने कहा कि मुझे फोन नहीं आया। मेरी एक सीनियर लीडर से बात हुआ तो मैंने कहा कि मुझे एंजाइटी हो रही है। तो उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं अगर सीएम नहीं बनोगी तो कोई बात नहीं। मैंने उनसे कहा कि नहीं बनूंगी की बात नहीं है, मैं ये सोच रही हूं कि अगर बन जाऊंगी तो क्या होगा। मैंने ये कभी नहीं सोचा कि बन गई तो कैसे होगा।'

दिल्ली विश्वविद्यालय से मुख्यमंत्री तक के सफर पर क्या बोलीं रेखा गुप्ता?

जब नाविका कुमार ने सीएम रेखा गुप्ता से पूछा कि ये सफर कैसा रहा, मुख्यमंत्री बनने के बाद जो आपने देखा, वो आपने कैसे देखा? तो इसके जवाब में सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि 'सच में ये सफर 30 साल, 1993 से शुरू होकर... जब एक छात्र के नाते मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया। एक ही निर्देश घर से मिली थी कि गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन लेना है। कॉलेज में मैं यूनियन से जुड़ी फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के यूनियन से जुड़ी। मैंने स्टूडेंट्स के हक के लिए लड़ाई लड़ी। एक वक्त ऐसा आया कि समझ में आया कि कुछ करना है तो टेबल के इस पार आना होगा। मैंने तीन बार एमसीडी का इलेक्शन जीता। जब जहां रही मैंने उससे जुड़े मुद्दे उठाए। जब मैं एजुकेशन कमेटी की सदस्य थी तो हमने दिल्ली के स्कूलों में बच्चों के ड्रेस से जुड़ा मुद्दा उठाया और बच्चों के लिए एक बेहतर की अनुमति दिलाई। इस कदम के बाद अच्छा लगता है कि सरकारी स्कूल के बच्चे भी प्राइवेट स्कूल के बच्चों की तरह एक अच्छा और बेहतर ड्रेस पहन सकते हैं। सिस्टम में रहकर चीजों को समझना और इसमें सुधार करना हमेशा से मेरी प्राथमिकता थी।'

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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