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दिल्ली कार धमाका केस में एक और खुलासा; डॉक्टरों के खातों में 40 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन, मिला खास पैटर्न

दिल्ली कार विस्फोट मामले की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को बैंक खातों से जुड़े संदिग्ध लेन-देन का बड़ा सुराग मिला है। डॉ. शाहीन, डॉ. आदिल, डॉ. आरिफ और डॉ. परवेज से जुड़े खातों में सात सालों में 40 करोड़ रुपये से अधिक का असामान्य लेन-देन सामने आया। इसमें एक खास पैटर्न दिखाई भी दे रहा है, जो इसे संदिग्धता के घेरे में ले जा रहा है।

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दिल्ली धमाका मामले में एक और खुलासा (फोटो साभार: PTI)

Photo : PTI

Delhi Blast Investigation Update: दिल्ली कार विस्फोट मामले की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को पैसे-रुपयों के मामले में एक बड़ा सुराग मिला है। डॉ. शाहीन, डॉ. आदिल, डॉ. आरिफ और डॉ. परवेज से जुड़े बैंक खातों की गहन जांच में सात सालों के दौरान 40 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया है। इन खातों में पैसे का आना-जाना छोटे-छोटे अमाउंट में हुआ, जो जांच एजेंसियों को गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।

संदिग्ध लेन-देन का पैटर्न

जांच में यह भी सामने आया कि कई खातों में हर सप्ताह 20,000 से 25,000 रुपये के बीच लगातार छोटे ट्रांजैक्शन किए जाते रहे। कुछ खातों में हर 15 दिन में पैसा जमा होने के बाद अगले ही दिन दूसरे खाते से निकाल लिया जाता था। 6 नवंबर को तो कई खातों से एक साथ लाखों रुपये निकाले गए, जो सुरक्षा एजेंसियों के संदेह को और गहरा करता है। सबसे अहम बात यह रही कि बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन में एक खास पैटर्न अपनाया गया, 1 लाख 1 रुपये, 2 लाख 1 रुपये जैसे अमाउंट हर महीने 25 से 28 तारीख के बीच जमा और निकासी किए गए। अब इसको लेकर ऐसा माना जा रहा है कि रकम में ‘1 रुपये’ जोड़कर पैसा भेजना किसी विशेष कोड की तरह इस्तेमाल किया गया हो सकता है, जो किसी खास मकसद के लिए किए गए भुगतान का संकेत देता है।

2021 के बाद बंद हुए कई अकाउंट

एजेंसियों ने पाया कि कुछ बैंक खाते 2021 के बाद से पूरी तरह निष्क्रिय हो गए, जबकि अधिकांश लेन-देन नगद निकासी या छोटे ऑफलाइन ट्रांजैक्शन के माध्यम से किए गए। ऑनलाइन ट्रांजैक्शन बेहद कम होने से इस पूरे पैटर्न पर संदेह बढ़ गया है।

कानपुर के 7 संदिग्ध मोबाइल नंबर

वहीं, दिल्ली धमाके की जांच अब कानपुर तक पहुंच गई है। शहर के सात मोबाइल नंबरों के तार विस्फोटक मिलने की घटनाओं और लाल किले के पास हुए धमाके से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, ये मोबाइल नंबर धमाके से पहले घटनास्थल के आसपास सक्रिय थे। इन नंबरों से संवेदनशील इलाकों के 22 मोबाइल नंबरों पर कॉल और व्हाट्सएप मैसेज भेजे गए। अब सुरक्षा एजेंसियां इन 22 नंबरों के मालिकों की लोकेशन, पहचान और गतिविधियों को भी ट्रेस कर रही हैं।

कानपुर की डॉक्टर फैकल्टी पर निगाहें

GVSM मेडिकल कॉलेज की पूर्व फैकल्टी डॉ. शाहीन सईद और उसके भाई डॉ. परवेज अंसारी के नाम सामने आने के बाद से कानपुर में हलचल बढ़ गई है। एटीएस, एनआईए, आईबी और अन्य केंद्रीय एजेंसियां शहर में सक्रिय हैं और कई स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। वित्तीय लेन-देन, मोबाइल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा के आधार पर एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क एक संगठित और योजनाबद्ध साजिश का हिस्सा हो सकता है। जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि खातों में हुई संदिग्ध गतिविधियों और मोबाइल नंबरों की लोकेशन से आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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Vinod Mishra
विनोद मिश्राauthor

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन है।

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