दिल्ली

दिल्ली के म्यूजियम से डांसिंग गर्ल की रेप्लिका चोरी, हिरासत में प्रोफेसर

राष्ट्रीय संग्रहालय से डांसिंग गर्ल की रेप्लिका (अनुकृति) चोरी हो गई है। घटना के बाद संग्रहालय की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ कर्मियों ने तलाशी अभियान चलाते हुए एक संदिग्ध को पकड़ लिया। जांच में उसके पास से रेप्लिका बरामद हो गई।

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सांकेतिक फोटो (Istock)

दिल्ली : जिले के थाना कर्तव्यपथ इलाके में राष्ट्रीय संग्रहालय से डांसिंग गर्ल की रेप्लिका चोरी होने का मामला सामने आया है। हालांकि, घटना के बाद संग्रहालय में सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तलाशी अभियान चलाकर एक व्यक्ति को पकड़ा। जांच में व्यक्ति के पास से रेप्लिका बरामद हुई। इस मामले पुलिस को घटना के बारे में बताया गया है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने सुरक्षाकर्मी द्वारा पकड़े व्यक्ति को पकड़ा है।

मामला 20 सितंबर की दोपहर का है। जांच में पकड़े गए व्यक्ति ने बताया कि वह अशोका यूनिवर्सिटी सोनीपत में प्रोफेसर है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने म्यूसियम से तीन रेप्लिका और खरीदी थी। गलती से चौथी उसके बैग में आ गई जो CISF की चेकिंग में आ गई। पुलिस को गिरफ्तारी के बाद थाने से ही जमानत मिल गई थी, जो रेप्लिका चोरी हुई थी वो उसकी कीमत महज ढाई हजार रुपए थी।

हिरासत में व्यक्ति कॉलेज में प्रोफेसर

पुलिस को पकड़े गए व्यक्ति ने बताया कि वह एक कॉलेज में प्रोफेसर है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है। निखिल कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि 20 सितंबर की दोपहर करीब 2.40 बजे उन्हें चोरी की सूचना मिली थी।

दैनिक जागरण के हवाले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, असली डांसिंग गर्ल कांस्य की एक मूर्ति है जो सिंधु घाटी की सभ्यता की मोहनजोदड़ो साइट से प्राप्त हुई थी। यह मूर्ति 2500 ईसापूर्व के आसपास बनाई गई होगी। सीआईएसएफ कर्मियों ने इस मामले की जानकारी संग्रहालय में कार्यरत निखिल कुमार को दी।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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