दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, जिसका मुख्य कारण हरियाणा और पंजाब में धान की पराली जलाना है। इस समस्या के समाधान के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने आवश्यक कदम उठाए हैं। आयोग ने इन राज्यों की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे एनसीआर से बाहर स्थित ईंट भट्टों और चीनी मिलों में पराली को ईंधन के रूप में जलाने के वैकल्पिक तरीकों पर ध्यान दें।
सीएक्यूएम का उद्देश्य खुले में फसल अवशेषों को जलाने की प्रथा को समाप्त करना और औद्योगिक क्षेत्र में स्वच्छ, टिकाऊ ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देना है। हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण हैं, इसलिए आयोग ने इन राज्यों के ईंट भट्टों को धान की पराली आधारित छर्रों या ब्रिकेट्स के सह-फायरिंग को अपनाने के निर्देश दिए हैं।
20 प्रतिशत हिस्सेदारी
इसके तहत, राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 1 नवंबर 2025 तक ईंधन में पराली आधारित छर्रों या ब्रिकेट्स की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हो। यह अनुपात 1 नवंबर 2026 तक बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया जाएगा और 1 नवंबर 2027 तक इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। आयोग को इस दिशा में की गई प्रगति की मासिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।
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