दिल्ली

फिर कहते हैं मैं लड़ता बहुत हूं... केजरीवाल ने LG पर मुफ्त बिजली बंद करने का आरोप लगाते हुए कसा तंज

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 25, 2023, 03:05 PM IST

अरविंद केजरीवाल ने एलजी विनय सक्सेना पर दिल्ली में फ्री बिजली स्कीम को बंद करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि वह इस साजिश को कभी सफल नहीं होने देंगे।

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अरविंद केजरीवाल

Photo : BCCL

Delhi News: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल विनय सक्सेना के बीच सियासी लड़ाई चूहे-बिल्ली के खेल की तरह हो गई है। हर दिन आप संयोजक दिल्ली एजली पर कोई न कोई आरोप लगाते हैं और फिर दूसरी तरफ से नए-नए जवाब आते हैं। ताजा मामला दिल्ली में मुफ्त बिजली को लेकर है। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली एलजी पर फ्री बिजली स्कीम को बंद करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली की जनता के हक में केजरीवाल चट्टान की तरह खड़ा मिलेगा। उन्होंने ट्वीट किया, फिर कहते हैं केजरीवाल लड़ता बहुत है। दिल्ली की फ्री बिजली को बंद करने के लिए साजिश रची जा रही है। लेकिन हम उनकी साजिश को कभी सफल नहीं होने देंगे। दिल्ली की जनता के हक के लिए केजरीवाल चट्टान बनकर खड़ा मिलेगा। उन्होंने आगे कहा, LG साहब, बाद में कृपया यह मत कहिएगा कि मर्यादाएं टूट रही हैं।

आतिशी के ट्वीट को किया रीट्वीट

दरअसल, यह बात केजरीवाल ने सरकार में मंत्री आतिशी मार्लेना के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखी है। आतिशी ने ट्वीट करते हुए लिाा था कि 14 दिन से दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री व पॉवर मंत्री को बिना बताए फ्री बिजली की फाइल LG साहब से मुख्य सचिव व बिजली सचिव के बीच कहीं घूम रही है। आखिर क्या छिपाना चाहते है? क्या डिस्कॉम से कोई सांठगाठ है? अगर कोई षड्यंत्र नही है तो इतना डर क्यों? फाइल चुनी हुई सरकार के सामने रखिए। इससे पहले आतिशी ने विधानसभा में कहा था कि फाइल को रोके रकना चुनी हुई सरकार और विधानसभा का बहुत बड़ा अपमान है। उन्होंने कहा था कि इसमें बहुत बड़ी साजिश है, बिजली कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

केजरीवाल ने की थी मिलकर काम करने की अपील

इससे एक दिन पहले शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली एजली से सरकार के साथ मिलकर काम करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वह कोई मेहमान नहीं हैं, जो दिल्ली के बारे में कुछ नहीं जानते हों।

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प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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