दिल्ली

लोकतंत्र की संगठित लूट है 'वोट कटौती', EC बीजेपी की ट्रोल आर्मी को दे रहा सामाग्री; 'आप' नेता सौरभ भारद्वाज ने लगाए आरोप

दिल्ली सरकार में मंत्री रहे सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भारतीय चुनाव आयोग एक ट्रोल की तरह व्यवहार कर रहा है, जो बीजेपी की ट्रोल आर्मी को सामग्री दे रहा है ताकि विपक्ष के नेताओं के पीछे पड़ा जा सके।

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आप नेता सौरभ भारद्वाज (फोटो-@AamAadmiParty)

दिल्ली : कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों वोट चोरी के मुद्दे को लेकर मुखर हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं। राहुल के साथ कई अन्य विपक्षी पार्टियां भी इस मामले को तूल दे रही हैं। इसी बीच शुक्रवार को आम आदमी पार्टी ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली सरकार में मंत्री रहे सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भारतीय चुनाव आयोग एक ट्रोल की तरह व्यवहार कर रहा है, जो बीजेपी की ट्रोल आर्मी को सामग्री दे रहा है ताकि विपक्ष के नेताओं के पीछे पड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन गोलमोल करके बात कहता है ताकि, विपक्ष के नेताओं को टारेगट किया जा सके।

सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया कि चुनाव आयोग विपक्ष की शिकायतों को नजरअंदाज कर रहा है और आरटीआई के जरिए भी सही जानकारी देने से कतरा रहा है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 5 जनवरी 2025 को दिल्ली की तत्कालीन सीएम आतिशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को चिट्ठी लिखकर शिकायत की थी कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वोट काटने की एप्लीकेशन दी जा रही हैं। कहा कि 29 अक्टूबर से 15 दिसंबर के बीच वोट डिलीशन के लिए 6,166 एप्लीकेशन दी गई थीं। लेकिन, इस पर कोई एक्शन नहीं हुआ और इलेक्शन कमीशन ने कह दिया ऑनलाइन एप्लीकेशन डाली जा सकती है, लेकिन उन्होंने कहा कि डिलेशन पॉशिबल नहीं है।

सौरभ भारद्वाज ने चुनाव आयोग के 'एक्स' पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए कहा कि कृपया वैध मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटाने की कोशिश, धोखाधड़ी और चुनावी प्रक्रिया में हेराफेरी के लिए दर्ज की गई एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराएं। यह स्पष्ट रूप से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को हाईजैक करने के लिए एक संगठित सिंडिकेट था। लोग जानना चाहते हैं कि क्या कोई गिरफ्तारी हुई है? उन्होंने कहा कि 8 महीने हो गए हैं, इसलिए अब तक चार्जशीट दाखिल हो जानी चाहिए थी। अगर आप हलफनामे का इंतजार कर रहे हैं तो मैं हलफनामे पर हस्ताक्षर करके उसे जमा करने के लिए तैयार हूं। हम सरकार द्वारा लगाए गए बेतुके मुकदमे से नहीं डरते हैं। सौरभ भारद्वाज ने दूसरे एक्स पोस्ट में लिखा, "जो वकील भाई प्रसिद्ध होना चाहता है, मेरे लिए एफिडेविट टाइप करवाओ। चुनाव आयोग को एफिडेविट दे ही दिया जाए।

दिल्ली में काटे गए इतने वोट

उन्होंने कहा कि बीजेपी और इलेक्शन कमीशन मुद्दों से भटकाने के लिए नए ट्रोल को हवा देता है। सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि 2020 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 1,48,000 थी, लेकिन 2025 के समरी रिवीजन के बाद यह संख्या घटकर 1,06,000 रह गई। तकरीबन 42,000 वोट काट दिए गए। ये एप्लीकेशन उन लोगों के नाम से डाली गई, जो वास्तव में वहां रहते हैं। उन्होंने कहा ये काम सवैंधानिक संस्था का नहीं हो सकता है। भारत का चुनाव आयोग बीजेपी को ट्रोल करने के लिए बारूद दे रहा है।

AAP नेता ने आरोप लगाया कि उस दौरान अलग-अलग तारीखों पर चुनाव आयोग को लगातार शिकायती पत्र भेजे गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी उठा चुकें हैं, लेकिन ईसी इस पर चुप्पी साधे हुए है।

उन्होंने कई उदाहरण देते हुए बताया कि तरुण कुमार चौटाला, उषा देवी, सुनीता देवी और अन्य लोगों के नाम पर वोट कटवाने की दर्जनों अर्जियां दाखिल की गईं, जबकि संबंधित लोगों ने ऐसी किसी भी अर्जी से साफ इनकार किया। भारद्वाज ने कहा कि यह फर्जीवाड़ा सीधे तौर पर लोगों के मतदान के अधिकार का हनन है और कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री आतिशी ने 5 जनवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। इसके बाद 8 और 9 जनवरी को भी उन्होंने पत्र भेजे, वहीं आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी चुनाव आयोग को शिकायत दी थी। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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