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दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा, आंधी-बारिश से गिरेगा तापमान; AQI में सुधार; GRAP-II हटा

दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश से मौसम में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है तो पॉल्यूशन के लेवल पर सुधार हुआ है। बुधवार देर शाम तक हवा की क्वालिटी (AQI) में गिरावट के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने अक्टूबर माह (2025) से लागू जीआरएपी के चरण-II प्रतिबंध हटा लिया है।

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दिल्ली में बारिश का अलर्ट

Delhi NCR Rain Alert : दिल्ली-एनसीआर में बुधवार की रात से अचानक बदले मौसम ने पॉल्यूशन पर बड़ा असर छोड़ा है। दिनभर हल्की हवाओं के साथ बूंदाबांदी ने प्रदूषण के कणों को दबाने में मदद की है, जिसके कारण शाम तक हवा की क्वालिटी (एक्यूआई) में बड़ा सुधार देखा गया। लिहाजा, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में लागू जीआरएपी के चरण-II प्रतिबंध हटा दिए। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले 2 दिन तक दिल्ली-एनसीआर में मौसमी गतिविधियां होने से मौसम में नमी रहेगी और दिन का तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस गिरेगा, जिससे हल्की सर्द महसूस होगी। वहीं, रात के तापमान में बदलाव की गुंजाइश नहीं है, लेकिन सुबह तेज ठंडक महसूस होगी।

आईएमडी का पूर्वानुमान है कि 19 फरवरी की शाम तक आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर गरज चमक और बिजली चमकने के साथ हल्की बारिश का येलो अलर्ट जारी रहेगा। इस दौरान मौसम के गंभीर होने का अनुमान है।

सीपीसीबी ने बताया कि बारिश और हवाओं की गति बढ़ने से पॉल्यूशन पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और एक्यूआई लेवल नीचे जा सकता है। फिलहाल, दिल्ली का AQI 220 के आसपास रहेगा है, जो खराब श्रेणी में है। अगले 2 दिन तक न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। कमोबेश ऐसा ही मौसम नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में रह सकता है। इन सभी शहरों में प्रदूषण के लेवल में कमी आने का अनुमान है। फिलहाल, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) का चरण-I और II पिछले साल क्रमशः 14 और 19 अक्टूबर से लागू था, जिसे आज II चरण को हटा लिया गया।

सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक, 0 से 50 के बीच के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को अच्छा , 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 को मध्यम, 201 से 300 को खराब, 301 से 400 को अत्यंत खराब और 401 से 500 को गंभीर श्रेणी में रखता है।

ग्रैप-1 कब लागू किया जाता है?

ग्रैप-1 को तब लागू किया जाता है, एक्यूआई यानी हवा की गुणवत्ता 200 से 300 के बीच होती है। इस चरण में निर्माण कार्य पर जैसे बिल्डिंग, सड़क या अन्य निर्माण कार्य पर हल्के फुल्के प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

ग्रैप-2 कब लागू होता है?

ग्रैप-2 तब लागू किया जाता है, जब हवा की क्वालिटी (AQI) जब 301 से 401 के बीच दर्ज की जाती है। इसमें ग्रैप-1 के सभी प्रतिबंधों के साथ स्कूलों को बंद करने और शहरों में निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाती है।

ग्रैप-3 कब लागू होता है?

ग्रैप-3 तब लागू किया जाता है, जब हवा की गुणवत्ता (AQI) 401 से 450 के बीच होती है। इस स्तर पर प्रदूषण के पहुंचने पर ग्रैप-2 के प्रतिबंधों के साथ सभी औद्योगिक इकाइयां यानी कारखाने, फैक्ट्रियों को बंद करते हुए सभी प्रकार के निर्माण और विध्वंश कार्यों को रोकते हुए कड़े उपाय लागू किये जाते हैं।

ग्रैप-4 कब लागू होता है?

ग्रैप-4 सबसे खतरनाक या सबसे हाई लेवल के प्रदूषण को टच करना है, जो एक्यूआई 450 से अधिक होने पर लागू किया जाता है। इस स्तर पर प्रदूषण को कम करने के लिए सभी प्रकार के प्रतिबंध एक साथ लगाए जाते हैं, जिसके तहत स्कलूों में ऑनलाइन कक्षाएं लागू होती हैं। इस दौरान अधिकांश कंपनियों में वर्फ फ्रॉम होम जैसी सेवाएं लागू की जाती हैं।

कैसे चेक करें पॉल्यूशन

उत्तर भारत में सर्दियों के सीजन की शुरुआत से प्रदूषण का मीटर तेजी से भागने लगता है। बढ़ते पॉल्यूशन को प्रति घंटे या दिन के हिसाब से तुरंत कैसे चेक करें? इसके लिए गूगल ने पिछले दिनों अपने नेविगेशन ऐप में नया फीचर जोड़ा था। इसकी सहायता है आप रियल टाइम पॉल्यूशन डेटा को ट्रैक कर सकते हैं। कुल मिलाकर आप गूगल मैप्स के जरिए भी रियल टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चेक कर सकते हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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