नौकरी के बदले जमीन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू यादव को एक करारा झटका दिया है। आज यानी मंगलवार 24 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमीन के बदले रेलवे में नौकरी देने से जुड़े मामले को रद्द करने की लालू यादव की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और इसमें कोई मेरिट नहीं पाया गया।
न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने कहा कि मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी। गौरतलब है कि लालू यादव ने 2022 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज FIR और दाखिल चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी।
लालू यादव की याचिका में यह दलील दी गई थी कि CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं ली। हालांकि, अदालत ने कहा कि यह प्रावधान 2018 में लागू हुआ और यह पुराने मामलों पर लागू नहीं होता। चूंकि, आरोप 2004 से 2009 के बीच के हैं, इसलिए इस धारा का लाभ उन्हें नहीं दिया जा सकता।
बता दें कि यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल में रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले जमीन ली गई। यह जमीन लालू यादव के परिवार जनों के नाम पर लिखवाई गई। CBI के अनुसार, कई लोगों ने या उनके रिश्तेदारों ने पटना सहित अन्य स्थानों पर भी रेलवे में नौकरी पाने के लिए लालू यादव के परिवार को सस्ती कीमत पर ट्रांसफर कर दी थी।
लालू यादव परिवार ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। अब इस फैसले के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
लालू यादव की तरफ से कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मनिंदर सिंह के साथ ही वरुण जैन, नवीन कुमार, सुमित सिंह, एकता वत्स, अपराजिता जमवाल, जानवी नारंग और सतीश कुमार पेश हुए। जबकि सीबीआई की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और डीपी सिंह के साथ ही मनु मिश्रा, गरिमा सक्सेना, ईमान खेरा, श्रेया दत्त, सम्राट गोस्वामी, हितार्थ राजा और अदिति आंदले पेश हुए।
