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दिल्ली में गर्मी से राहत की अनोखी पहल, शालीमार बाग में शुरू हुआ सोलर पावर्ड 'कूलिंग हट' का पायलट प्रोजेक्ट

दिल्ली सरकार ने भीषण गर्मी से राहत देने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसके तहत उत्तर-पश्चिम दिल्ली में सौर ऊर्जा से संचालित 'कूलिंग हट' का प्रायोगिक परीक्षण किया जा रहा है। यह विशेष संरचना खस घास और पानी के छिड़काव की मदद से प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करेगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे शहर के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जाएगा।

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भीषण गर्मी से जूझते दिल्लीवासियों के लिए बड़ी राहत (AI फोटो)

Delhi Cooling Hut Project: दिल्ली सरकार ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए एक नई पहल की है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि उत्तर-पश्चिम दिल्ली में सौर ऊर्जा से संचालित एक सार्वजनिक 'कूलिंग हट' को प्रायोगिक परीक्षण के तौर पर शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह की अन्य संरचनाओं को तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। इस योजना के तहत शीतलन सुविधाओं से लैस छायादार विश्राम स्थल उपलब्ध कराए जाएंगे।

जून के पहले हफ्ते में शालीमार बाग में उद्घाटन

अधिकारी ने बताया कि एक छोटी झोपड़ी के आकार में डिजाइन की गई इस संरचना में चारों ओर पारंपरिक खस घास की गद्दी लगाई जाएगी और साथ ही पानी के छिड़काव वाली प्रणाली भी होगी, जिससे अंदर बैठे लोगों को प्राकृतिक रूप से ठंडक का अनुभव होगा। अधिकारी के अनुसार, निर्माणाधीन यह सुविधा मई के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जून के पहले सप्ताह में शालीमार बाग में इसका उद्घाटन करेंगी।

क्या-क्या होगा कूलिंग हट में उपलब्ध?

'कूलिंग हट' में आने वाले लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था, ठंडा पानी पीने के लिए डिस्पेंसर और मोबाइल फोन चार्ज करने के सॉकेट उपलब्ध होंगे। छत पर लगे सोलर पैनल इस सुविधा को बिजली प्रदान करेंगे, जिससे यह ऊर्जा-कुशल और भीषण गर्मी के महीनों के दौरान उपयोग के लिए उपयुक्त होगी। उन्होंने बताया, "इस पहल का मकसद एक सार्वजनिक शीतलन क्षेत्र तैयार करना है, जहां लोग, विशेष रूप से मजदूर, यात्री और भीषण गर्मी से प्रभावित निवासी, कुछ देर बैठकर गर्मी से राहत पा सकें।"

प्रायोगिक परियोजना के रूप में करेगा काम

खस घास और पानी के छिड़काव से उत्पन्न होने वाली धुंध से आसपास का तापमान कम होने और लू लगने जैसी गर्मी से संबंधित बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि शालीमार बाग में स्थापित यह 'कूलिंग हट' एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में काम करेगा और अगर जनता की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही और यह मॉडल कारगर साबित हुआ, तो आने वाले महीनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी प्रकार की संरचना स्थापित की जा सकती हैं।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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