Delhi News: दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं और पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। पब्लिक अकाउंट समिति (PAC) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India (CAG) की हालिया रिपोर्टों ने सिस्टम की कई खामियों को उजागर किया है, जिससे आम लोगों की सेहत पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
अस्पतालों में 21% स्टाफ की कमी
PAC की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में करीब 21% स्टाफ की कमी है। डॉक्टरों पर इतना दबाव है कि लोकनायक हॉस्पिटल में एक डॉक्टर रोजाना औसतन 87 मरीज देख रहा है, जिससे हर मरीज को पांच मिनट से भी कम समय मिल पाता है। इससे इलाज की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है।
सर्जरी के लिए मरीजों को करना पड़ रहा महीनों तक इंतजार
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बड़े अस्पतालों में सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में मरीजों को 2 से 3 महीने तक और बर्न व प्लास्टिक सर्जरी के लिए 8 महीने तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कई ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की कमी के कारण बंद पड़े हैं।
55% भूजल पीने लायक नहीं पाया गया
दूसरी ओर, CAG की रिपोर्ट ने दिल्ली के पानी की स्थिति को और भी चिंताजनक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2022 के बीच जांचे गए 55% भूजल के नमूने पीने के योग्य नहीं पाए गए। दिल्ली जल बोर्ड द्वारा कई जगह बिना ट्रीटमेंट के पानी सप्लाई किया जा रहा है, जो लोगों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि पानी की जांच निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं हो रही है। जहां 43 पैरामीटर पर टेस्ट होना चाहिए, वहां केवल 12 पर ही जांच की जा रही है। इसके अलावा भारी धातुओं और खतरनाक तत्वों की जांच तक नहीं की जा रही, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
पानी की बर्बादी और चोरी की घटनाएं
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए, दिल्ली में पानी की भारी बर्बादी और चोरी भी सामने आई है। नॉन-रेवेन्यू वॉटर (NRW) 51 से 53% तक पहुंच गया है, जिससे हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। PAC और CAG दोनों ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की सिफारिश की है चाहे वह अस्पतालों में स्टाफ की भर्ती हो या पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए सख्त निगरानी।
