दिल्ली : कोई भाई भतीजावाद नहीं , कोई हेरा फेरी नहीं, ना ही मनमानी ना ही अपनों को मलाई -ना किसी का दवाब ना किसी का प्रभाव-एकदम पारदर्शी- सबकी आंखों के सामने। किसी से कोई पक्षपात नहीं...ये उदाहरण दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने जीएसटी विभाग में लॉटरी आधारित नियुक्ति देकर पेश किया है। सरकार का कहना है कि सिफारिश पर आधारित मनमानी की जगह निष्पक्षता पर आधारित प्रक्रिया लागू की गई है और 87 जीएसटी अधिकारियों को स्वयं द्वारा लॉटरी निकालकर उनके वार्ड आवंटित किए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में सार्वजनिक रूप से, आयुक्त, विशेष आयुक्त, संयुक्त आयुक्त और सहायक आयुक्त सहित वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति में की गई।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 'एक्स' पर बुधवार को बताया कि व्यापार एवं कर विभाग में 87 वस्तु एवं सेवा कर (GST) अधिकारियों की तैनाती लॉटरी प्रणाली से की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, सेवा विभाग ने 23 अप्रैल को एक आदेश के तहत विभिन्न अधिकारियों को स्थानांतरित किया था और इसके बाद लॉटरी प्रणाली से कुल 87 जीएसटी अधिकारी एवं निरीक्षकों को तैनाती दी गई है। इस महीने के शुरू में गुप्ता ने व्यापार एवं कर विभाग का औचक निरीक्षण किया था और कई अधिकारियों को ड्यूटी से गैरहाजिर पाया था। इसके बाद लगभग 162 अधिकारियों का तबादला राज्य जीएसटी कार्यालय में कर दिया गया।
गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर काम कर रही है और यह पहल उसी दिशा में एक मजबूत कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि हर नियुक्ति, तैनाती और प्रशासनिक निर्णय पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और नियम-आधारित हो ताकि ईमानदार अधिकारियों को प्रोत्साहन मिले और व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत हो।
बयान के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई, जिसमें सभी नए अधिकारी/कर्मचारी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जैसे- आयुक्त, विशेष आयुक्त व संयुक्त आयुक्त उपस्थित थे। यह सुनिश्चित किया गया कि पूरी प्रक्रिया सभी के सामने खुले और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो, जिससे किसी भी प्रकार की शंका या पक्षपात की संभावना न हो।
मुख्यमंत्री ने बताया कि लॉटरी प्रणाली के तहत प्रत्येक अधिकारी ने स्वयं पर्ची निकाली और इसके लिए दो अलग-अलग बॉक्स रखे गए थे, एक बॉक्स में अधिकारियों/कर्मचारियों के नाम और दूसरे बॉक्स में रिक्त वार्ड का नंबर था।
उन्होंने बताया कि दोनों बॉक्स से पर्ची निकालने के बाद ही संबंधित अधिकारी का वार्ड तय हुआ। गुप्ता ने कहा कि पूरी कार्यवाही की शुरुआत से अंत तक वीडियोग्राफी कराई गई ताकि हर चरण का आधिकारिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके और भविष्य में किसी भी स्तर पर सत्यापन संभव हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार आने वाले समय में अन्य विभागों में भी ऐसी पारदर्शी और तकनीक-आधारित प्रक्रियाओं को लागू करने पर विचार कर रही है ताकि सुशासन को और मजबूत किया जा सके।
