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Delhi Assembly Security Breach: पांच दिन से घर से गायब था सरबजीत, किसान आंदोलन का है समर्थक! दिल्ली विधानसभा में सेंधमारी करने वाले पर खुलासा

दिल्ली विधानसभा में सुरक्षा में हुई चूक ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, जहां एक व्यक्ति के संदिग्ध तरीके से प्रवेश करने से कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सरबजीत सिंह की गतिविधियां घटना से पहले कई दिनों तक संदिग्ध बनी रहीं और उसके मकसद को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है।

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आरोपी सरबजीत सिंह के बारे में अहम खुलासे

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Delhi Vidhansabha: दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में हुई चूक की जांच के दौरान आरोपी सरबजीत को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने अब तक हमले के पीछे की वजह का खुलासा नहीं किया है। जानकारी यह भी मिली है कि वह घटना से करीब पांच दिन पहले ही अपने घर से लापता हो गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है 37 वर्षीय सरबजीत सिंह महीने की 1 तारीख को पीलीभीत से निकला था और उसी रात उसने फोन के जरिए अपने परिवार से संपर्क किया था। इसके बाद वह 2 तारीख को बरेली पहुंचा और फिर घटना वाले दिन दिल्ली आ गया। गौर करने वाली बात यह है कि उसने अपने परिवार को न तो अपने ठहरने की जगह के बारे में बताया और न ही अपनी यात्रा के मकसद के बारे में कोई जानकारी दी।

चालक समेत तीन लोगों को लिया गया हिरासत में

गौरतलब है कि, इस घटना के बाद से विधानसभा परिसर के आसपास हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। पुलिस ने बाद में उत्तरी दिल्ली के रूप नगर से चालक सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया और टाटा सिएरा नामक वाहन को जब्त कर लिया। बता दें कि, यह घटना दोपहर 2:10 बजे घटी, जब अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में थे। विधानसभा की सुरक्षा में प्रतिदिन दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि पूरी घटना महज पांच से सात मिनट के बीच हुई। पुलिस की कई टीमों और बम निरोधक दस्ते ने विधानसभा परिसर की पूरी तरह से तलाशी ली ताकि किसी भी तरह के खतरे की संभावना को खत्म किया जा सके। इस तलाशी के बाद परिसर में कुछ भी संदिग्ध नहीं पाया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने गुलदस्ते की भी जांच की।

सरबजीत के परिवार ने किया यह दावा

पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के पीलीभीत निवासी 37 वर्षीय सरबजीत सिंह के रूप में हुई है और माना जा रहा है कि वह "किसान आंदोलन" का समर्थक भी है। उत्तर प्रदेश पुलिस पीलीभीत स्थित सिंह के आवास पर पहुंची और उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की, जिन्होंने दावा किया कि वह मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित है और उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा में हुई चूक की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है और पूरे मामले की निगरानी विशेष आयुक्त स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी। यह घटना ऐसे वक्त हुई है जब विधानसभा को हाल में खत्म हुए बजट सत्र के दौरान बम संबंधी घटना हुई थी।

तेज रफ्तार से गेट नंबर दो को मारी टक्कर

पुलिस का आरोप है कि घटना के दौरान, आरोपी ने पीलीभीत पंजीकरण संख्या वाली गाड़ी को खतरनाक तरीके से चलाया और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को कुचलने की कोशिश भी की, जिससे उनकी जान जाते-जाते बची। पुलिस ने बताया कि एसयूवी में केवल सिंह ही सवार था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सिंह ने तेज रफ्तार से गेट नंबर दो को टक्कर मारी। यह गेट सिविल लाइंस में शामनाथ मार्ग की ओर खुलता है। आरोप है कि उसने अध्यक्ष की आधिकारिक कार के अंदर गुलदस्ता और माला रख दी। सूत्रों के अनुसार, आरोपी कुछ देर के लिए गाड़ी के अंदर भी बैठा था। पुलिस ने बताया कि उस समय अध्यक्ष की कार लॉक नहीं थी, क्योंकि चालक अपना सामान रखने के लिए अध्यक्ष के कमरे में गया था। सूत्रों के अनुसार, चूंकि गेट नंबर दो मुख्य द्वार नहीं है, इसलिए वहां सिर्फ एक सीआरपीएफ जवान मौजूद था। सदन का सत्र न चलने पर इसके आसपास सुरक्षा कम रहती है।

आरोपी से चल रही है पूछताछ

पुलिस ने कहा कि सिविल लाइंस थाने में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की हत्या की कोशिश, अनाधिकृत प्रवेश, अपराध को अंजाम देने की तैयारी, लोक सेवकों के खिलाफ आपराधिक बल प्रयोग, लोक सेवकों के काम में बाधा डालने व लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हालांकि इस पूरी घटना के मकसद पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन सरबजीत सिंह ने सोशल मीडिया मंच पर कई पोस्ट साझा किए थे जिनमें उसने 2021 में दिल्ली की सीमा पर कृषि कानूनों के खिलाफ हुए आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के प्रति समर्थन किया था। इनमें से कुछ पोस्ट बाद में हटा दिए गए थे।

दिल्ली विधानसभा में कितने गेट हैं?

दिल्ली विधानसभा में छह द्वार हैं। गेट नंबर दो वीआईपी द्वार के रूप में निर्धारित है और इसे केवल महत्वपूर्ण आयोजनों के दौरान ही खोला जाता है, जबकि द्वार संख्या एक और द्वार संख्या छह सामान्य आवागमन के लिए उपयोग किए जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि सिंह मानसिक रूप से अस्थिर है और टीमें उससे पूछताछ कर रही हैं तथा मकसद अभी स्पष्ट नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "लेकिन हम पूरे मामले की हर संभव पहलू से जांच कर रहे हैं," और उन्होंने विधानसभा को हाल में दी गई बम की धमकियों का जिक्र किया।

आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच जारी

बताया जा रहा है कि, गुलदस्ता रखने के बाद आरोपी उसी गेट नंबर 2 से परिसर से बाहर निकल गया। पुलिस ने बताया कि पूरी दिल्ली में तलाशी अभियान चलाया गया और शाम करीब 4:15 बजे रूप नगर इलाके में वाहन को रोक लिया गया। सिंह को उत्तरी दिल्ली के रूप नगर इलाके में एक नाले के पास पुलिस नाके पर दो अन्य व्यक्तियों के साथ पकड़ा गया। परिवार वालों ने बताया है कि बीमारी के दौरान उसका व्यवहार अनियंत्रित हो जाता है। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विधानसभा में प्रतिदिन कुल 22 सीआरपीएफ जवान और 70 से 80 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं।

दिल्ली सचिवालय के एक अधिकारी ने दी यह जानकारी

दिल्ली सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना ने सुरक्षा संबंधी "गंभीर" चिंताएं पैदा कर दी हैं और अधिकारी इसे संभावित "सुरक्षा चूक" के रूप में देख रहे हैं। घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस प्रमुख सतीश गोलछा और विशेष पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था) रविंद्र यादव घटनास्थल पर पहुंचे और जांच का निरीक्षण किया। यादव ने बताया कि पुलिस ने घटनाओं के क्रम का पुनर्निर्माण करने के लिए इलाके और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की। उन्होंने कहा, "घटना के तुरंत बाद और अधिकारियों से मिली सूचना के आधार पर, संदिग्ध कार के विवरण के साथ आसपास के राज्यों और स्थानीय थानों को अलर्ट भेजा गया।"

घटना की हर पहलू से हो रही है जांच

अधिकारी ने बताया, "पूरी राष्ट्रीय राजधानी में सड़कों पर कई बैरिकेड और नाके लगाए गए थे और कार रूप नगर पुलिस नाके के पास देखी गई। कार चालक तेज गति से गाड़ी चलाकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सतर्क कर्मचारियों ने उसे रोककर हिरासत में ले लिया।" फोरेंसिक टीमों और पुलिस ने जब्त किए गए वाहन की जांच की। वे उसके मोबाइल फोन और उससे जुड़े ईमेल पते की भी जांच करेंगे ताकि यह पता चल सके कि क्या उसका किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि से कोई संबंध है। एक सूत्र ने बताय, "सीसीटीवी फुटेज की पूरी जांच की जाएगी। हम मामले की गहन जांच में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हम उसके कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि क्या वह किसी संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में था। टीमें घटना की हर पहलू से जांच कर रही हैं।"

(भाषा इनपुट के साथ)

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Anuj Mishra
अनुज मिश्रा author

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं।... और देखें

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