Datia By Election: मध्य प्रदेश से इस वक्त राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) को दतिया से टिकट ऑफर कर दिया है। नरोत्तम मिश्रा दतिया से पूर्व विधायक, राज्य में मंत्री रह चुके हैं। पिछले चुनाव में हार गए थे, लेकिन उपचुनाव में वापसी करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दे दिया, जिसके बाद उनके समर्थकों ने बवाल काट दिया और सड़क जाम कर दी, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े।
किसने दिया नरोत्तम मिश्रा को टिकट का ऑफर?
टिकट न मिलने से नाराज नरोत्तम मिश्रा को मध्य प्रदेश UBT राज्य प्रमुख सुनील शर्मा ने ऑफर दिया। उन्होंने कहा कि यदि नरोत्तम मिश्रा चाहें तो शिवसेना (यूबीटी) में शामिल होकर पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिन्ह मशाल से मैदान में उतर सकते हैं। उनके लिए खुद उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे चुनाव प्रचार करेंगे। इस बात की जानकारी खुद शर्मा ने सोशल मीडिया पर साझा की है।
नरोत्तम मिश्रा ने क्या कहा?
शिवसेना के इस ऑफर पर अभी तक नरोत्तम मिश्रा की ओर से कोई जवाब नहीं आया है, लेकिन उन्होंने टिकट न मिलने पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर दी है। हालांकि उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांति की अपील करते हुए कहा कि पार्टी फोरम के भीतर अपनी बात रखने का एक उचित तरीका होता है, इस तरह से नहीं।
पिछली बार हार गए थे नरोत्तम मिश्रा
बता दें कि मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। तिवारी के नाम की घोषणा किये जाने के बाद वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मिश्रा को टिकट मिलने की उम्मीद थी और उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। ऐसे में भाजपा का यह फैसला उनके लिए झटका माना जा रहा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक मतों से हराया था। हालांकि, दिल्ली की एक अदालत ने इसी वर्ष अप्रैल में धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और दतिया सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया।
