महाराष्ट्र में त्रिभाषा सूत्र पर बड़ा मोड़; समिति ने सौंपी राज्य सरकार को रिपोर्ट, सियासी हलचल तेज
- Reported by: अतुल सिंहEdited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Feb 9, 2026, 06:47 PM IST
महाराष्ट्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत त्रिभाषा सूत्र को लेकर गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। हिंदी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में किस कक्षा से लागू किया जाए, इस पर सरकार अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आने वाले दिनों में कैबिनेट बैठक में इस रिपोर्ट पर चर्चा के बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी।
समिति ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में मान्यता देने पर अपनी रिपोर्ट सौंपी (फोटो: PTI)
Maharashtra News: महाराष्ट्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत त्रिभाषा सूत्र के अमल को लेकर गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। सरकार आने वाले समय में इस रिपोर्ट पर विचार कर अंतिम निर्णय लेने वाली है। राज्य में हिंदी भाषा को किस कक्षा से अनिवार्य किया जाए, इस विषय पर अध्ययन के लिए बनाई गई नरेंद्र यादव समिति ने आज अपनी अंतिम रिपोर्ट फडणवीस सरकार को प्रस्तुत की। गौरतलब है कि बीते वर्ष महाराष्ट्र सरकार ने पहली कक्षा से हिंदी भाषा को अनिवार्य करने का निर्णय लिया था। लेकिन इस फैसले के खिलाफ जनता और विपक्षी दलों के तीव्र विरोध के बाद सरकार ने अपना फैसला वापस लेते हुए इस मुद्दे पर एक विशेष समिति का गठन किया था।
रिपोर्ट होगी कैबिनेट बैठक में पेश
समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में किस कक्षा से लागू किया जाना उचित होगा। रिपोर्ट तैयार करने से पहले समिति ने पूरे महाराष्ट्र में शिक्षा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विभिन्न जानकारों से मुलाकात की। इसके साथ ही संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के सुझाव भी आमंत्रित किए गए। इन सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार करने के बाद समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार की है। अब महाराष्ट्र सरकार इस रिपोर्ट को कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत कर उस पर विस्तृत चर्चा करेगी और इसे लागू करने या नहीं करने के को लेकर अंतिम फैसला लेगी।
सियासी हलचल तेज
समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के लागू किए जाने को लेकर एक बार फिर नई बहस शुरू हो गई है। हिंदी भाषा को लेकर पहले भी राज्य में विवाद देखने को मिला था। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे लगातार सरकार के फैसले का विरोध करते रहे हैं। वे हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किए जाने के पक्ष में नहीं थे और इस संबंध में सरकार के रुख से असंतुष्ट नजर आए। दरअसल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा पहली से पांचवीं तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में वैकल्पिक तौर पर पढ़ाने का निर्णय लिया था। हालांकि, इस फैसले को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े स्तर पर विरोध दर्ज किया गया, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया।
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