चेन्नई में कैसा दिखेगा तूफान का असर (सांकेतिक तस्वीर)
Cyclone Effect on Chennai: बंगाल की खाड़ी में एक नए चक्रवात के बनने की संभावना तेज हो गई है। मौसम ब्लॉग चेन्नई रेंस (Chennai Rains) के अनुसार, इस समय बनने वाला निम्न दबाव का क्षेत्र (LPA) चक्रवात की दिशा और तीव्रता तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नवंबर के अंतिम दिनों में बनने वाले सिस्टम बेहद संवेदनशील होते हैं, और इनके 'जेनिसिस पॉइंट' यानी उत्पत्ति स्थल में थोड़ा-सा बदलाव भी चक्रवात के रास्ते को सैकड़ों किलोमीटर तक बदल सकता है।
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि सुमात्रा के पास लगभग 200 किलोमीटर लंबा समुद्री क्षेत्र दो अलग-अलग अनुकूल मौसम क्षेत्रों के बीच स्थित है, और यही हिस्सा चक्रवात की दिशा को प्रभावित करता है। अगर LPA 90 डिग्री E के पश्चिम में बनता है, तो अधिकांश चक्रवात 15 डिग्री N से ऊपर नहीं चढ़ते और सीधे तमिलनाडु की ओर बढ़ते हैं। वहीं 92°E के पूर्व में बनने वाले सिस्टम भी तमिलनाडु पर असर डाल सकते हैं, बशर्ते वे करीब 10°N अक्षांश के आसपास विकसित हों। 90°E और 92°E के बीच बनने वाले सिस्टम के बारे में मौसम विशेषज्ञ 50:50 की स्थिति बताते हैं। इसके अलावा, मलक्का जलडमरूमध्य के पास बनने वाला LPA अक्सर पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ता है और तमिलनाडु में असर डालने की आशंका बढ़ाता है। इसी संवेदनशीलता के कारण हर छोटा बदलाव, यहां तक कि आधे डिग्री का भी, मॉडल के अनुमान को प्रभावित करता है। यही वजह है कि अलग-अलग मॉडल बार-बार दिशा बदलते हुए दिखते हैं।
हालांकि चक्रवात की दिशा और ताकत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन तमिलनाडु में व्यापक बारिश लगभग तय मानी जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्वी तट की ओर बह रही नम पूर्वी हवाएं अगले कुछ दिनों में तमिलनाडु के कई हिस्सों में बारिश बढ़ाएंगी। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में मौजूद अपर-एयर सर्कुलेशन (UAC) भी बारिश में इजाफा करेगा, जब तक कि LPA और मजबूत न हो जाए।
दक्षिण तमिलनाडु में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है, खासकर मंजोलै घाट क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर चेन्नई और उत्तर तमिलनाडु में सुबह और देर रात के समय मध्यम बारिश हो सकती है, बीच-बीच में भारी बारिश के दौर भी संभव हैं।
पिछले तीन हफ्तों से बारिश की कमी झेल रहे तमिलनाडु ने 18 नवंबर को आखिरकार बारिश के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद पूर्वोत्तर मानसून अभी भी लगभग 6% घाटे में है, जिस कारण लोगों में मानसून के फेल होने का डर बढ़ रहा है।
अधिकांश मौसम मॉडल अब संभावित चक्रवात के बनने पर सहमत हैं, लेकिन उसकी सटीक दिशा और तीव्रता तभी स्पष्ट होगी जब निम्न दबाव का क्षेत्र अगले 48 से 72 घंटों में आकार लेगा। फिलहाल विशेषज्ञों की सलाह है कि घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क जरूर रहें। तो अपडेट्स पर नजर बनाए रहिए और छतरी तैयार रखिए।
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