दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस और वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने फैसला किया है कि अब निजी स्कूलों के खातों की गहराई से जांच (ऑडिट) कराई जाएगी। माता-पिता की लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल जरूरत से ज्यादा फीस वसूल रहे हैं।
वो पैसों का सही हिसाब नहीं दे रहे। इसी वजह से दिल्ली सरकार ने यह निर्णय लिया है।
क्या होगा ऑडिट में?
सरकार खास ऑडिट टीमें बनाएगी
हर टीम में 10 चार्टर्ड अकाउंटेंट होंगे
करीब 1,794 निजी (बिना सहायता वाले) स्कूलों की जांच होगी
पिछले 3 साल के खातों की जांच की जाएगी
किन बातों की होगी जांच?
स्कूल की फीस वसूली का पूरा रिकॉर्ड
खर्चों का ब्यौरा, बिल और रसीदें
छात्रों की संख्या और उनसे मिलने वाली आय
जरूरत पड़ी तो स्कूल में जाकर जांच भी होगी
ऑडिट के बाद हर स्कूल की अलग-अलग रिपोर्ट बनेगी
यह पूरी प्रक्रिया Directorate of Education की निगरानी में होगी। ऑडिट के बाद हर स्कूल की अलग-अलग रिपोर्ट बनेगी। अगर किसी स्कूल में गड़बड़ी पाई गई, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
पूरे ऑडिट पर करीब ₹6.3 करोड़ खर्च होने का अनुमान
इस पूरे ऑडिट पर करीब ₹6.3 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि पहले की सामान्य जांच से बड़ी गड़बड़ियां सामने नहीं आ पा रही थीं, इसलिए अब विस्तृत जांच जरूरी है ताकि माता-पिता को राहत मिले और स्कूलों की मनमानी पर रोक लगे।
निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी
गौर हो कि शिक्षा मंत्री ने दिसंबर में कहा था कि बीते कई दशकों से निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई थी, लेकिन पहले की सरकारें इस मुद्दे पर ठोस कानून नहीं ला सकीं। मौजूदा सरकार ने कम समय में यह कानून लागू कर दिखाया है, जिससे यह साफ होता है कि सरकार अभिभावकों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा कोई कारोबार नहीं, बल्कि बच्चों का अधिकार है।
