Rajendra Bharti News: मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से ठीक कुछ घंटे पहले एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस पार्टी ने अपने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। कांग्रेस द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, रविवार (2 अगस्त) देर रात राजेंद्र भारती को प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड करने का फैसला लिया गया। बता दें कि आजमध्य प्रदेश की अहम मानी जाने वाली दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव का नतीजा घोषित किया जाएगा। पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक मामले में सजा मिलने के बाद उन्हें अयोग्य घोषित किए जाने से यहां उपचुनाव हुआ था। दतिया में मुख्य मुकाबला बीजेपी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच है।
पूर्व विधायक भारती का आरोप
निलंबन की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेंद्र भारती ने कहा कि इस फैसले से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की एक साजिश है और कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने नरोत्तम मिश्रा के साथ मिलकर यह चुनाव लड़ा है। भारती ने कहा कि वह 2028 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत दिखाएंगे।
क्यों हुआ यह उपचुनाव: साल 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को 7,700 से अधिक वोटों से हराया था। हालांकि, अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन साल की सजा सुनाई, जिसके बाद विधानसभा से उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी और यह सीट खाली हो गई।
चुनावी मुकाबला: इस उपचुनाव में कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा की ओर से आशुतोष तिवारी उम्मीदवार हैं। मैदान में कुल 20 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं।
क्या हैं राजनीतिक मायने?
टिकट न मिलने पर शुरुआत में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुई थीं, हालांकि बाद में मिश्रा ने भावुक होकर भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को पूरा समर्थन देने का वादा किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे राज्य सरकार के स्थायित्व पर तो असर नहीं डालेंगे, लेकिन हालिया छात्र प्रदर्शनों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पृष्ठभूमि में 2028 के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए एक बड़ा लिटमस टेस्ट है।
