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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: "आस्था के केंद्र को बनाया गया राजनीतिक मुद्दा", छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम का बड़ा बयान

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित एसआईटी का कार्यकाल बढ़ाए जाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने कहा है कि आस्था के इस बड़े केंद्र को राजनीतिक रूप से प्रस्तुत किया गया और इसके प्रमुख आयोजनों में एक ही चेहरे को केंद्र में रखा गया।

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छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव (फोटो- PTI)

Photo : PTI

Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही एसआईटी का कार्यकाल बढ़ाए जाने पर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टी.एस. सिंह देव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, लेकिन समय के साथ इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया गया। उनका कहना है कि मंदिर के संपूर्ण प्रबंधन को एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित कर दिया गया। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे भूमि पूजन का कार्यक्रम हो या फिर प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन, दोनों अवसरों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही प्रमुख चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यकाल 15 दिन बढ़ा

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर से जुड़े इस मामले की जांच कर रहे तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का कार्यकाल 15 दिन बढ़ा दिया गया। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। प्रदेश सरकार ने आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया था और शुरुआत में उसे 15 दिन का समय दिया था।

SIT ने मांगा सीएम योगी से अतिरिक्त समय

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में दान प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) का कार्यकाल 15 जुलाई बढ़ा दिया है। मामले के विभिन्न पहलुओं से गहन छानबीन के लिए एसआईटी ने मुख्यमंत्री से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार करते हुए उन्होंने आगामी 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

8 आरोपियों को किया गया गिरफ्तार

एक अधिकारी ने बताया कि 23 जून को एसआईटी द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद 25 जून को मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई और आठ आरोपियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि मामले की गहराई से जांच करने और जांच का दायरा बढ़ाने के लिए एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन और बढ़ा दिया गया है।

कौन-कौन है SIT में शामिल?

एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त आईएएस विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल है। बयान के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन करने वाले सीएम योगी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि एसआईटी इस प्रकरण में हर पहलू की गहनता और निष्पक्षता से जांच करते हुए सच्चाई सामने लाएगी।

श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर

23 जून को एसआईटी के प्रमुख सदस्य लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपा थी, जिसमें कठोर कार्रवाई की सलाह दी गई थी। इन संस्तुतियों के आधार पर 25 जून को ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें आठ नामजद व अन्य अज्ञात व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था। सभी नामजद अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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