चण्डीगढ़

ये ठीक वैसा ही था, जैसे बॉक्सिंग रिंग में एक हाथ बांध उतार दें और कहें कि लड़ना है- ऑपरेशन ब्लू स्टार पर बोले पूर्व कर्नल

  • Produced by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Jan 30, 2023, 05:15 PM IST

Operation Blue Star: कर्नल लेफ्टिनेंट जर्नल कुलदीप सिंह ब्रार ने ये सारे बातें समाचार एजेंसी एएनआई की स्मिता प्रकाश के साथ हुए खास पॉडकास्ट के दौरान बताईं, जिसका एक हिस्सा टि्वटर पर 30 जनवरी, 2023 को जारी किया।

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)

Photo : IANS

Operation Blue Star: ऑपरेशनल ब्लू स्टार के समय भारतीय सेना और सुरक्षाबलों के पास न तो पर्याप्त संसाधन नहीं थे और न ही एक्शन लेने को लेकर खुली छूठ थी। उस दौरान की स्थिति का खुलासा साल 1971 के पुराने सिपाही और ऑपरेशन ब्लू स्टार के कर्नल लेफ्टिनेंट जर्नल कुलदीप सिंह ब्रार (सेवानिवृत्त) ने समाचार एजेंसी एएनआई की स्मिता प्रकाश के साथ हुए पॉडकास्ट में किया है। उन्होंने बताया है कि उस वक्त की परिस्थितियां ठीक वैसी ही थीं, जैसे बॉक्सिंग रिंग में किसी का एक हाथ बांध उतार दिया जाए और फिर उससे कहा जाए कि आपको लड़ना है।

वह बोले- स्वर्ण मंदिर के भीतर फिजिकली (खुद से) घुसने के अलावा और कोई चारा नहीं था...यह तय हुआ था। हमारी ओर से मशीन गन्स चलाई जा रही थीं। वे उन जगहों से चलाई जा रही थीं, जहां से हमने कभी सोचा भी नहीं था और उन लोकेशंस को देखा भी नहीं था।

यह पूछे जाने पर कि आपको बंदूक चलाने वालों की पोजीशंस के बारे में नहीं मालूम था? जवाब आया- नहीं...यह ठीक उसी तरह से था, जैसे किसी बॉक्सर को रिंग में उसका एक हाथ पीछे बांध कर उतार दिया जाए और फिर उससे कहा जाए कि एक हाथ से फाइट करो। ऐसा इसलिए, क्योंकि उस समय हमारे पास सारे संसाधन नहीं थे।

बकौल ब्रार, "उन आठ से 10 घंटों में हमने तीन सौ से चार सौ को खो दिया था। यह उतना सरल नहीं था। मुझे मालूम है कि मैंने उस घटना के बाद भी कैसे-कैसे बुरे सपने देखे थे। चूंकि, ऊपर से तमाम पाबंदियां थीं कि आपको कम से कम सेना के साथ यह सुनिश्चित करना है कि इमारत और मंदिर को कोई नुकसान न हो। ऐसे में हम भारी हथियार नहीं लाना चाहते थे।"

उन्होंने यह भी साफ किया कि अकाल तख्त पर भारतीय सेना की ओर से फायरिंग नहीं की गई थी। हमें इस चीज के ऑर्डर नहीं मिले थे। पर फैक्ट यह भी था कि आप तब क्या करते..., क्या आप सिर्फ अपने लोगों को मरने देते...? आपको कुछ को एक्शन लेना था।

अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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