चण्डीगढ़ : हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने गुरुवार को एफआईआर दर्ज की। चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से बताया गया कि अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 108 आरडब्ल्यू 3(5) बीएनएस और 3(1)(आर) पीओए (एससी/एसटी) अधिनियम के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई चंडीगढ़ सेक्टर पुलिस ने की है। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।
बता दें कि हरियाणा के आईपीएस वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ सेक्टर-11 स्थित अपने आवास पर गोली मारकर जान दे दी थी। घटना के समय उनकी पत्नी अमनीत पी कुमार घर पर मौजूद नहीं थीं। वह हरियाणा कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और इस वक्त प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ जापान दौरे पर थीं। वह वर्तमान में विदेश सहयोग विभाग की आयुक्त एवं सचिव के पद पर तैनात हैं।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली कि सेक्टर-11 में स्थित सरकारी आवास में वाई पूरण कुमार ने आत्महत्या कर ली है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने घर को सील कर दिया और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को जांच के लिए बुलाया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अधिकारी ने अपने लाइसेंसी हथियार से खुद को गोली मारी।
चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर के अनुसार, सेक्टर-11 पुलिस स्टेशन को दोपहर करीब 1:30 बजे एक आत्महत्या की खबर मिली थी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार का शव उनके घर पर मिला। वाई पूरन कुमार हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी थे और इस समय पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में तैनात थे। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य पुलिस में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई थी।
बुधवार को पूरन कुमार की पत्नी और आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 पुलिस स्टेशन के एसएचओ को पत्र लिखकर हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजरानिया के खिलाफ प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दोनों अधिकारियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 108 (उकसाने के लिए आत्महत्या) और एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने और तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। अमनीत ने दावा किया था कि इन अधिकारियों की जातिगत प्रताड़ना के कारण ही उनके पति ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर खुद को गोली मार ली।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने निष्पक्ष न्याय की रखी मांग
इस मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य सरकार से इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया। हुड्डा ने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को कानून के कठघरे में लाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है ताकि आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें।
