चण्डीगढ़

बहादुरगढ़ के फुटवियर पार्क की चार फैक्ट्रियों मे लगी भीषण आग, लाखों रुपये का समान जलकर हुआ राख

एचएसआईडीसी के फुटवियर पार्क की चार फैक्ट्री में आग लग गई। दमकल विभाग की आधा दर्जन से ज्यादा गाड़ियां मौके पर पहुंची। चारों फैक्ट्री में जूते चप्पल बनाए जाते हैं। आग लगने का कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ । पहले 155 नंबर फैक्ट्री से आग शुरू हुई थी। इसके बाद आसपास की तीन फैक्ट्रियों में भी आग लगी । इस दुर्घटना में कच्चा व तैयार माल समते लाखों रुपये का समान जलकर राख हुआ ।

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एचएसआईडीसी के फुटवियर पार्क की चार फैक्ट्री में लगी आग।

Fire News: हरियाणा के बहादुरगढ़ स्थित हरियाणा राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम (एचएसआईडीसी) के फुटवियर पार्क की चार फैक्ट्रियों मे भीषण आग लग गई। आग से फैक्ट्रियों में रखा लाखों का कच्चा और तैयार माल जलकर राख हो गया। आग बुझाने के लिये फायर ब्रिगेड की दर्जन भर गाड़ियां लगी हुई है। आग सबसे पहले फैक्ट्री नंबर 155 में शुरू हुई फिर इसके बाद साथ लगती तीन और फैक्ट्रियों तक आग फैल गई।

चार फैक्ट्रियों में लगी आग, मालिकों को लाखों का हुआ नुकसान

आग बुझाने के साथ फायर ब्रिगेड आग को आगे बढ़ने से रोकने में भी जुटी हुई है। हालांकि अभी तक आग लगने के कारण साफ नहीं हुए हैं लेकिन आग के कारण फैक्ट्री मालिकों को लाखों का नुकसान जरूर हुआ है। आग से कोई जनहानि की सूचना अभी तक नहीं है।

गनीमत थी कि छुट्टी का दिन होने के कारण नहीं हुई कोई हताहत

बहादुरगढ़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के नरेंद्र छिकारा का कहना है कि छुट्टी का दिन होने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई है लेकिन आग लगातार बढ़ रही है और फायर ब्रिगेड के इंतजाम नाकाफी है। उन्होंने बताया कि सारी फैक्ट्रियां आगे पीछे साथ साथ हैं जिसके कारण एक फैक्ट्री से शुरू हुई आग दूसरी और तीसरी फिर चौथी तक पहुंच गई।

फिलहाल पुलिस मौके पर व्यवस्था बनाने में जुटी है और फायर ब्रिगेड लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। आसपास के इलाकों से भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बुलाई गई है ताकि आग पर जल्द काबू पाया जा सके ।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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