Chandigarh: इस देश में एक ऐसा अनोखा गुरुद्वारा है, जहां पर न तो लंगर बनता है और न ही गोलक है। फिर भी इस गुरुद्वारा में आने वाली संगत भूखी नहीं रहती। हम बात कर रहे हैं चंडीगढ़ में स्थित गुरुद्वारा नानकसर की। दरअसल, यह एकमात्र ऐसा गुरुद्वारा है, जहां पर मत्था टेकने आने वाली संगत अपने घर से बना लंगर लेकर आती है। इसमें देशी घी के परांठे, मक्खन, सब्जियां, दाल, फल और मिठाइयां होती है। इस लंगर को ही बाकी की संगतों में बांटा जाता है। इसके बाद जो लंगर बचता है उसे शहर के सभी सरकारी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। गुरुद्वारा नानकसर की यह प्रथा इसके निर्माण के बाद से ही चली आ रही है। इस गुरुद्वारे में लोगों की इतनी श्रद्धा है कि, आज तक कभी किसी संगत को भूखे पेट वापस नहीं जाना पड़ा।
चण्डीगढ़
Chandigarh: चंडीगढ़ के इस गुरुद्वारे में न तो गोलक है और न ही लंगर बनता, फिर भी कोई भूखा नहीं रहता
- Reported by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
- Updated Dec 9, 2022, 04:50 PM IST
Chandigarh: चंडीगढ़ में स्थित गुरुद्वारा नानकसर में न तो लंगर बनता है और न ही गोलक है। फिर भी इस गुरुद्वारा में आने वाली संगत भूखी नहीं रहती। यह एकमात्र ऐसा गुरुद्वारा है, जहां पर मत्था टेकने आने वाली संगत अपने घर से बना लंगर लेकर आती है। गुरुद्वारा नानकसर की यह प्रथा इसके निर्माण के बाद से ही चली आ रही है।
चंडीगढ़ में स्थित गुरुद्वारा नानकसर
KEY HIGHLIGHTS
- गुरुद्वारा नानकसर का निर्माण सन् 1943 से 1963 के बीच हुआ
- गुरुद्वारे नानकसर में आने वाली संगत अपने साथ लाती है लंगर
- गुरुद्वारे में तीन समय लगता है लंगर, लंगर लगाने के लिए लंबा इंतजार
