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Udaipur News: BJP कार्यकर्ता की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या, मतदान वाले दिन से था गायब

राजस्थान के उदयपुर में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या से बवाल मचा हुआ है। वीभत्स तरीके से की गई हत्या से पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया है।

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फाइल फोटो

उदयपुर: जिले में एक बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या से बखेड़ा खड़ा हो गया है। वीभत्स तरीके से सिर कूचकर की गई हत्या से पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव मतदान के दिन से ही शख्स गायब था। अब उसका सिर कुचला शव बरामद हुआ है, जिससे विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। बेरहमी से की गई हत्या से उसका चेहरा पहचानना मुश्किल हो रहा था, लेकिन बाद में कपड़ों से पहचान हो सकी। हालांकि, हत्या के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है।

खून से लथपथथी डेडबॉडी

मामला फलसिया थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। बेटे के मुताबिक, मतदान वाले दिन से पिता कांतिलाल गायब थे। जब वो शाम को घर नहीं लौटे तो खोजबीन शुरू की गई, लेकिन कहीं पता नहीं चला। रविवार को ढूंढने निकले तभी घर से थोड़ी दूर पर बॉडी नाले के पास औंधे मुंह पड़ी थी। कपड़े फटे थे और खून से लथपथ थे।

पोलिंग बूथ पर थे तैनात

फलासिया थाना पुलिस के अनुसार कांतिलाल मतदान के दिन झाड़ोल के भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल खराड़ी के लिए वोटर को पोलिंग बूथ तक लाने के काम में जुटा था। उसके बाद से वह गायब थे। उसी रात को पत्थर से सिर कुचल कर हत्या होने की आशंका है। पूरे कपड़े खून से सने थे। चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ था। जबड़े सहित बॉडी में कई जगह चोट के निशान थे। वहीं, कार्यकर्ता की हत्या से तमाम बीजेपी नेता मृतक के घर पहुंचे हैं। फिलहाल, पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। अब पुलिस आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है। मृतक कांतीलाल के बेटे ने पुलिस से पिता के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग की है।
Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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