भोपाल

बेतवा नदी को मिलेगा नया जीवन: स्थानीय लोगों की अनोखी पहल, 7 दिन में बना डाले 55 छोटे डैम

बेतवा नदी के सूखे उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करने के लिए पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने झिरी गांव में 55 चेक डैम बनाए और 500 फलदार पौधे लगाए। डॉ. आरके पालीवाल के नेतृत्व में यह अभियान पेड़ों की कटाई रोकने, जल संरक्षण और फलदार खेती को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इससे जल स्तर बढ़ने और आमदनी में वृद्धि की उम्मीद है।

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बेतवा को जीवित करने की स्थानीय लोगों की अनोखी पहल (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश में बेतवा नदी के सूखते उद्गम स्थल को फिर से जीवित करने के लिए पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने एक प्रेरणादायक पहल की है। भोपाल, सीहोर, रायसेन और विदिशा जिलों के लोगों ने मिलकर झिरी गांव में मई के अंतिम सप्ताह में 55 छोटे चेक डैम बनाए। इस क्षेत्र में एक साल पहले तक पानी बिल्कुल नहीं था। लेकिन अब सामूहिक प्रयासों से इसमें बदलाव आने लगा है। रविवार 29 जून को ग्रामीणों की मदद से 500 से अधिक फलदार पौधे भी लगाए गए, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी गांववासियों ने ली है।

इस अभियान का नेतृत्व रिटायर्ड आईआरएस अधिकारी डॉ. आरके पालीवाल कर रहे हैं। उन्होंने तीन साल पहले बेतवा अध्ययन एवं जनजागरण समूह के साथ मिलकर इस संकट को उजागर किया था। सरकार को रिपोर्ट भी दी गई, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्होंने तीन प्रमुख कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया है: पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर रोक, चेक डैम का निर्माण, और ज्यादा पानी की खपत वाली खेती के बजाय फलदार पौधों को बढ़ावा देना।

इस प्रयास में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने श्रमदान किया। हर परिवार को 10 पौधे सौंपे गए हैं, जिससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। उम्मीद की जा रही है कि इन कदमों से बेतवा नदी का उद्गम क्षेत्र पुनर्जीवित होगा और भविष्य में जल संकट से राहत मिलेगी।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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