भोपाल

MP में BJP नेता के बेटा का 2 नंबरी खेल, रची ऐसी मौत की कहानी, पुलिस नदी में लगाती रही गोता! CDR से साज़िश का पर्दाफाश

पूछताछ में युवक ने बताया की उसके पास 6 ट्रक और 2 पब्लिक व्हीकल है। जिनका एक करोड़ 40 लाख रुपए से अधिक का कर्जा बकाया है, किश्तें जमा नहीं हो पा रही। उसके छोटे भाई शिवम और शुभम ने उसे आइडिया दिया की किसी प्रकार मृत्यु प्रमाणपत्र बन जाए तो बैंको का कर्जा माफ हो सकता है।

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विशाल सोनी.

राजगढ़ : जिले के सारंगपुर में बीती 5 सितंबर की सुबह काली सिंध नदी में कार समेत गिरे भाजपा नेता महेश सोनी के बेटे विशाल सोनी की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ। पता चला कि कर्ज़ से परेशान भाजपा पार्षद महेश सोनी के बेटे ने खुद ही अपनी मौत की कहानी रची थी। पुलिस ने इस कहानी का पर्दाफाश कर दिया है। ट्रांसपोर्टर का कारोबार करने वाले विशाल सोनी ने बैंकों से भारी कर्ज़ा ले रखा था। जिसे चुकाने में वो नाकाम हो रहा था। खुद पर बढ़ते कर्ज को खत्म करने के लिए उसने खुद की ही मौत की कहानी रच डाली।

दरअसल, 5 सितंबर को हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर फौरन पहुंची और नदी में गिरी कार को निकालने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया। कार को नदी से निकालने के बाद पुलिस, प्रशासन, नगर पालिका का अमला, SDERF की टीमों के साथ ही करीब 50 संडावता ग्राम के युवा 20 किलोमीटर तक के इलाके में कई दिनों तक शव को खोजते रहे। 8वें दिन भी ज़ब डेड बॉडी नहीं मिली तो पुलिस ने दूसरे एंगल से मामले को समझा और CDR निकलवाई। सीडीआर की जांच की गई तो पता चला कि मृतक युवक महाराष्ट्र में जिंदा था।

कैसे हुआ खुलासा?

मामले का खुलासा करते हुए एसडीओपी अरविंद सिंह और थाना प्रभारी आकांशा हाड़ा ने बताया कि 5 सितंबर को सुबह-सुबह पुलिस को सूचना मिली की एक कार नदी में गिर गई है। पुलिस टीम गोताखोरों के साथ घटना स्थल पहुंची और कार को निकलवाया गया। राजगढ़ SDERF को सूचना देकर रेस्क्यू अभियान चलाया गया। पहले तीन दिनों में सफलता नहीं मिली। इसी बीच युवक के पिता महेश सोनी ने आरोप लगाए की पुलिस प्रशासन खोजबीन में सहयोग नहीं कर रहा। अगले दिन से अभियान में और तेजी लायी गयी। तीन टीम अलग अलग शव को खोजती रहीं। पुल से स्टॉप डेम तक पुरे एक किलोमीटर के क्षेत्र का मलबा तक छान लिया गया लेकिन बॉडी बरामद नहीं हुई। इसके बाद पुलिस को दूसरे एंगल से सोचना पड़ा और CDR निकलवाई गई। पुलिस को आशंका थी की कहीं अपहरण न हो। जांच के बाद पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस को सूचित करके नंबर को खोजने भेजा। महाराष्ट्र पुलिस की मदद से विशाल सोनी को संभाजी नगर जिले के फर्दापुर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव से दस्तयाब करने में कामयाबी मिली। पुलिस ने पूछताछ की तो उसके होश उड़ गए।

पिता भी साजिश में था शामिल

पूछताछ में युवक ने बताया की उसके पास 6 ट्रक और 2 पब्लिक व्हीकल है। जिनका एक करोड़ 40 लाख रुपए से अधिक का कर्जा बकाया है, किश्तें जमा नहीं हो पा रही। उसके छोटे भाई शिवम और शुभम ने उसे आइडिया दिया की किसी प्रकार मृत्यु प्रमाणपत्र बन जाए तो बैंको का कर्जा माफ हो सकता है। इसकी जानकारी उसके पिता को भी थी, बस इसी को लेकर 5 तारीख को गोपालपुरा में नदी किनारे आया और चलती कार से कूद कर कार को नदी में गिरा दिया। बिना मुंडेर की पुल होने से कार नदी में जा गिरी और विशाल इंदौर जा रही बस में बैठकर निकल गया।

दूसरे दिन अखबारों की खबरें पढ़कर विशाल महाराष्ट्र निकल गया। वहां से शिरडी, शिगनापुर घूमने चला गया। यहां रेस्क्यू टीम लगातार खोजबीन में जुटी रही, ग्रामीण भी अच्छी भावना से नदी में 20 किलोमीटर दूर तक हर मुमकिन स्थान पर खोजबीन की। हालांकि जैसे ही उसके पिता ने उसे बताया की उनकी साजिश का पर्दाफाश हो गया है तो कपड़े फाड़कर धूल से खुद को गंदा करके अपहरण की नई कहानी बनाकर फर्दापुर थाने में आत्मसमर्पण करने पहुंच गया।

पुलिस को भी शक हुआ जब चार दिन पहले शनिवार को पिता महेश सोनी ने गांव में दोस्तों से चर्चा की और कहा की जवान बेटा नहीं रहा, उसका अंतिम संस्कार करने का भी मौका नहीं मिला, लेकिन उसकी आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं करना चाहता हूं ताकि उसकी आत्मा को शांति मिले। इस दौरान पिता ने ये भी कहा कि सारंगपुर नगर पालिका में संपर्क करके मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाना है ताकि उसके बच्चों को कुछ लाभ दिलवा दें, जिससे उनका गुजर बसर हो जाए।

सारंगपुर पुलिस को फर्दापुर महाराष्ट्र पुलिस ने पुरे मामले की सूचना दी उसके बाद सोमवार को ही एसआई अमित त्यागी युवक को लेने के लिए महाराष्ट्र के लिए निकल गए। जहां से मंगलवार देर रात उसे सारंगपुर थाने लाया गया। बुधवार को सुबह राजगढ़ में एसपी अमित तोलानी ने युवक से पूछताछ की जब युवक ने सारा सच पुलिस को बता दिया। हालांकि मामले में थाना प्रभारी आकांशा हाड़ा ने बताया की खुद की मौत की साजिश रचने और पुलिस प्रशासन को लगातार 10 दिन तक खोजबीन में परेशान होना पड़ा, लेकिन संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं मिला जिसमे उसे सजा दी जा सकती थी, इसलिए युवक को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है ।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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