Madhya Pradesh Elections 2023: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने दो बड़े सियासी दांव चले। पहला- इलेक्शंस के लिए भाजपा उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची में पूर्व में (साल 2018 और 2013 के समय) हारी कई सीटों पर जोर दिया। भाजपा ने 39 कैंडिडेट्स की इस लिस्ट में 14 ऐसे लोगों को दोबारा मौका दिया है, जिन्हें पिछली बार हार का मूंह देखना पड़ा था और खास बात है कि हारने वाले इन लोगों में तीन पूर्व मंत्री (लालसिंह आर्य, ललिता यादव और ओमप्रकाश धुर्वे) भी हैं। सियासी रणनीति में फेरबदल के तहत सूबे में सत्तारुढ़ बीजेपी ने चुनाव कार्यक्रम के ऐलान से पहले ही पांच महिलाओं सहित 39 प्रत्याशियों की यह लिस्ट निकाल दी। ऐसा कर के भगवा ब्रिगेड चुनावी तैयारियों और प्रत्याशियों को तय करने के मामले में अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस से आगे निकल गई।
सूची पर सरसरी नजर डालें तो हम पाते हैं कि इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कई सीट हैं। 39 भाजपा उम्मीदवारों में से लगभग सभी सीट पर नवंबर 2018 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस से हार गई थी। कांग्रेस ने 2018 दिसंबर में अपनी सरकार बनाई थी, लेकिन मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में विधायकों के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने से वह सत्ता से बाहर हो गई थी, जबकि बीजेपी ने जिन 39 सीट के लिए उम्मीदवार घोषित किए, उनमें से 38 सीट पर मौजूदा समय में कांग्रेस व एक सीट पर (पथरिया से बसपा विधायक रामबाई) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का कब्जा है।

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इस बीच, भाजपा का दूसरा बड़ा दांव- मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ताजा कदम से जुड़ा है, जो कि उन्होंने गुरुवार (17 अगस्त, 2023) को उठाया। सीएम ने एक सरकारी योजना के तहत साइकिल खरीदने के लिए प्रदेश के 4.60 लाख स्कूली बच्चों के बैंक खातों में 207 करोड़ रुपए की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान राजधानी भोपाल में राज्य के सबसे बड़े 'सीएम राइज' स्कूल की आधारशिला भी रखी। साथ ही कहा कि उनकी सरकार बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास करेगी।
बकौल चौहान, ‘‘बच्चों, आपके 'मामा' (मुख्यमंत्री के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला प्यार का शब्द) यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास करेंगे कि आपको शिक्षा प्राप्त करने और अपने सपनों को साकार करने में कोई समस्या न हो। स्कूली बच्चों का उज्ज्वल भविष्य राज्य का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करेगा। यह मेरा मिशन है।’’ दरअसल, प्रदेश सरकार की एक योजना के तहत प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग प्रत्येक छात्र को साइकिल खरीदने के लिए 4,500 रुपये प्रदान करता है। राज्य सरकार के अनुसार इस योजना से 73 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित हुए।
चूंकि, ये कदम चुनाव से चंद महीने पहले उठाए गए हैं। ऐसे में सूबे के सियासी गलियारों में इन्हें अलग-अलग नजरियों से देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों और विश्लेषकों की मानें तो सीएम इस तरह की राहत, रियायत और कदमों के जरिए सूबे की बड़ी आबादी को साधना चाहते हैं। म.प्र में इस साल के अंत में 230 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं। राज्य की राजनीति भाजपा और कांग्रेस के बीच द्विध्रुवीय मानी जाती है, जबकि मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी (सपा) सहित अन्य दल प्रदेश में सीमांत खिलाड़ी माने जाते हैं।
