कल यानी मंगलवार 21 जुलाई को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi अचानक कांग्रेस नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) के बाहर धरना देने पहुंच गए। मनाने के बावजूद जब राहुल गांधी और कांग्रेस ने वहां से हटने से इनकार कर दिया तो पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक हटा दिया। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल मंगलवार सुबह से ही एक्टिव दिखे। केजरीवाल कल सोनम वांग्चुक से मिलने अस्पताल गए, जंतर-मंतर भी गए और प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। लेकिन शाम होते-होते राहुल गांधी के पीएम आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन के चलते प्राइम टाइम की पूरी लाइमलाइट राहुल गांधी लूट ले गए। ऐसे में AAP की नाराजगी सामने आना बड़ी बात नहीं। इस बात को लेकर AAP राहुल गांधी पर हमलावर है। चलिए समझते हैं इसके राजनीतिक मायने क्या हैं और आंदोलन के बारे में विस्तार से -
21 जुलाई की शाम का पूरा घटनाक्रम
जैसा कि आप जानते हैं कल शाम राहुल गांधी कांग्रेस नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचे और धरना-प्रदर्शन शुरू कर किया। उन्होंने सरकार से NEET पेपर लीक सहित अन्य मामले पर संसद में बहस की मांग की और शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रखी। केंद्र सरकार की तरफ से पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के साथ बातचीत भी की, लेकिन सहमति नहीं बनी। इस बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करके जनता से उनका समर्थन करने की मांग की। उन्होंने लिखा - 'मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।' हालांकि, कांग्रेस नेताओं के वहां डटे रहने पर पुलिस ने उन्हें वहां से जबरन उठा दिया। इस दौरान कांग्रेस के साथ मीडिया की भी पूरी अटेंशन राहुल गांधी को मिलती रही। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के इस अप्रत्याशित कदम से आम आदमी पार्टी बैखला गई। AAP की तरफ से संजय सिंह और आतिशी ने कमान संभाली। उन्होंने कांग्रेस पर आंदोलन का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।
पीएम आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन करते राहुल गांधी से मंत्री जितेंद्र सिंह ने की मुलाकात
संजय सिंह का पीएम मोदी और राहुल गांधी पर आरोप
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, 'CJP के धरने को कमजोर करने के लिए मोदी जी ने राहुल गांधी को अपने आवास पर धरने पर बिठा दिया।' इसके बाद संजय सिंह एक ओर सोशल मीडिया पोस्ट किया, इस पोस्ट में उन्होंने लिखा - 'देश के करोड़ों युवाओं के लिए वांग्चुक जी पिछले 23 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। जंतर मंतर पर देश का युवा आंदोलन कर रहा है। 20 जुलाई को युवाओं को बर्बरता पूर्वक पीटा गया। कांग्रेस एक महीने से आंदोलन को गाली दे रही है, अब राहुल गांधी जी कह रहे है 'जंतर मंतर नहीं हमारे धरने में शामिल हो।' आखिर युवाओं के आंदोलन को क्यों कमजोर करना चाहती है कांग्रेस? जंतर मंतर के आंदोलन में शामिल होने की अपील क्यों नहीं करती कांग्रेस?'
भाजपा-कांग्रेस मिले हुए हैं - आतिशी
इसी तरह दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी कांग्रेस और भाजपा की जुगलबंदी की बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा - 'ये बड़ा मजेदार है... ये वही पुलिस है जो CJP को संसद की तरफ 100 मीटर भी आगे नहीं बढ़ने दे रही थी, उसने राहुल गांधी को पीएम आवास तक जाने दिया।' उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन की मीडिया कवरेज को लेकर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा - 'एक महीने से चल रहे CJP प्रोटेस्ट को एक मिनट भी TV चैनल पर नहीं चलाया गया, अब राहुल गांधी के एक घंटे के प्रोटेस्ट को लाइव चलाया जा रहा है। इसका मतलब साफ है: राहुल गांधी को TV पर दिखाने का निर्देश बीजेपी से आया है।'
क्या राहुल गांधी ने आंदोलन हड़पने की कोशिश की?
नेता प्रतिपक्ष को धरना स्थल से उठाकर ले जाते सुरक्षाकर्मी
पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी को पुलिस ने जबरन उठा लिया। इस एक तस्वीर ने सबकुछ बदल दिया। राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा से लेकर सरकार के खिलाफ कई बार आवाज बुलंद की। लेकिन उनके राजनीतिक करियर में ऐसी तस्वीर की कमी थी, जो 21 जुलाई 2026 को पीएम आवास के बाहर पूरी हो गई। आज यह तस्वीर हर मोबाइल और टीवी तक पहुंच चुकी है। शायद यही वजह है कि AAP आज राहुल गांधी पर हमलावर हैं और उन्हें लग रहा है कि राहुल गांधी ने CJP आंदोलन को हड़पने की कोशिश की है। हालांकि, लोकतंत्र में ऐसी तस्वीरें आम बात हैं।
कांग्रेस नेता अजय राय का AAP पर तीखा हमला
इस बीच आज उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने AAP पर हमला बोला। उन्होंने AAP संजय सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा, 'ये साबित हो चुका है कि आम आदमी पार्टी, ये कहां से निकली पार्टी है। ये RSS के विंग में काम करते थे केजरीवाल। एक प्रकल्प चलता था। उसमें केजरीवाल और केजरीवाल की बीवी, दोनों जो विवेकानंद फाउंडेशन उन्होंने बनाया है। उस विवेकानंद फाउंडेशन में काम करते थे... विवेकानंद फाउंडेशन किसका है? RSS का है...'
कब शुरू हुआ CJP का आंदोलन?
दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना 20 जून को शुरू हुआ था। NEET पेपर लीक के विरोध में शुरू हुए इस आंदोलन की प्रमुख मांग शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर है। हालांकि आंदोलन के अगले ही दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। लेकिन शुरुआती दिनों में इस आंदोलन को वैसा राजनीतिक समर्थन नहीं मिला, जैसा अब दिख रहा है।
CJP के आंदोलन में कांग्रेस और AAP की भागीदारी
कांग्रेस देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी है और उसका कदम काफी अहमियत रखता है। कांग्रेस की तरफ से पहली बार 17 जुलाई 2026 को पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे और उन्होंने सोनम वांग्चुक व अभिजीत दिपके और आंदोलन से जुड़े लोगों से मुलाकात की। पवन खेड़ा के जंतर-मंदर पहुंचने के बाद कांग्रेस ने धीरे-धीरे इस आंदोलन को खुलेतौर पर अपना समर्थन देना शुरू किया। जबकि आम आदमी पार्टी का दावा है कि उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता आंदोलन की शुरुआत से ही इसमें सक्रिय हैं। हालांकि, अरविंद केजरीवार 16 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पहुंचे थे।
मंगलवार 21 जुलाई को जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह
राहुल गाधी के पीएम आवास पर प्रदर्शन से क्या बदला?
राहुल गांधी के पीएम आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन से भले ही आंदोलन की मांग पूरी न हुई हो। लेकिन विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक नेतृत्व और आंदोलन का श्रेय लेने के लिए कॉम्पटीशन जरूर बढ़ गया। कांग्रेस के अप्रत्याशित कदम से आम आदमी पार्टी बौखला गई है। लेकिन कांग्रेस हो, AAP या कोई अन्य दल, सभी को इस बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि आंदोलन की मांग क्या है और क्यों यह आंदोलन उठ खड़ा हुआ था।
